नई दिल्ली:
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चली आ रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) वार्ता आखिरकार पूरी हो गई है। 27 जनवरी 2026 को दोनों पक्षों ने इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर सहमति जता दी, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा द्विपक्षीय ट्रेड डील माना जा रहा है। इस समझौते से भारत का निर्यात (Export) करीब $75 बिलियन तक बढ़ने की उम्मीद है, जबकि भारत-EU के बीच कुल व्यापार $136.5 बिलियन से कहीं आगे जा सकता है।
यह डील केवल टैक्स कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे रोजगार, MSME सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग हब और आम उपभोक्ता—सभी पर सीधा असर पड़ेगा। हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर के बाद इसे पूरी तरह लागू होने में करीब एक साल का वक्त लग सकता है।

भारत को क्या मिलेगा सबसे बड़ा फायदा?
भारत के लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स को इस डील से सीधी बढ़त मिलेगी। करीब 99% भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में ड्यूटी-फ्री या बेहद कम टैक्स पर एंट्री मिलेगी।
1. टेक्सटाइल और कपड़ा उद्योग
तिरुपुर, सूरत और लुधियाना जैसे शहरों से होने वाले कपड़ा निर्यात पर ड्यूटी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इससे यूरोप के $263 बिलियन के कपड़ा बाजार में भारत की हिस्सेदारी तेज़ी से बढ़ेगी।
2. लेदर और फुटवियर
कानपुर, आगरा और वेल्लोर के लेदर क्लस्टर्स को बड़ी राहत मिलेगी। 17% तक लगने वाला टैक्स हटने से भारतीय जूते-चप्पल यूरोप में ज्यादा प्रतिस्पर्धी होंगे।
3. जेम्स, ज्वेलरी और इलेक्ट्रॉनिक्स
जयपुर, मुंबई और सूरत के ज्वेलरी एक्सपोर्ट पर ड्यूटी 14% से घटकर शून्य हो जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को भी यूरोपीय बाजार में नई उड़ान मिलेगी।
4. खेती और समुद्री उत्पाद
असम की चाय, केरल के मसाले और आंध्र प्रदेश व पश्चिम बंगाल के समुद्री उत्पादों को यूरोपीय सुपरमार्केट्स में बेहतर जगह मिलेगी।

यूरोप से आने वाला क्या होगा सस्ता?
भारत ने EU के 92% से अधिक उत्पादों पर रियायत देने पर सहमति जताई है, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं को भी फायदा मिलेगा।
- मशीनरी और केमिकल्स: यूरोप से आने वाली मशीनरी, मेडिकल डिवाइसेज़ और दवाइयों पर ड्यूटी (11%–44%) में बड़ी कटौती होगी।
- फल और प्रोसेस्ड फूड: सेब, कीवी, चॉकलेट और अन्य यूरोपीय फूड प्रोडक्ट्स सस्ते हो सकते हैं।
- वाइन और स्पिरिट्स: फ्रांस, इटली और स्पेन की वाइन पर कोटा सिस्टम के तहत टैक्स कम होगा।
कारें, स्टील और पर्यावरण नियम
- महंगी कारों पर राहत: €15,000 से कम कीमत वाली कारें डील से बाहर रखी गई हैं। लग्जरी कारों पर ड्यूटी 5 साल में घटाकर 10% की जाएगी।
- CBAM यानी कार्बन टैक्स: भारत को पूरी छूट नहीं मिली, लेकिन पर्यावरण मानकों को पूरा करने के लिए तकनीकी सहयोग मिलेगा।
- पढ़ाई और नौकरियां: भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए यूरोप में पढ़ाई और 144 सर्विस सेक्टर्स में काम के अवसर आसान होंगे।
आपकी जेब पर क्या होगा असर?
एक तरफ जहां यूरोपीय लग्जरी सामान, वाइन और मशीनरी सस्ती होंगी, वहीं दूसरी ओर भारत के निर्यात बढ़ने से नौकरियां, आय और MSME सेक्टर को मजबूती मिलेगी। कुल मिलाकर यह डील भारत की अर्थव्यवस्था को लंबी अवधि में बड़ा बूस्ट देने वाली मानी जा रही है।