उत्तर प्रदेश में रामगंगा नदी के किनारे रहने वाले लोगों और जमीन खरीदने की सोच रहे निवेशकों के लिए बड़ी खबर है। प्रशासन ने नदी किनारे अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए 166 गांवों में ‘ठियाबंदी’ लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस योजना के तहत अब फ्लड प्लेन जोन में किसी भी प्रकार का पक्का निर्माण नहीं किया जा सकेगा।
क्या है ‘ठियाबंदी’ और क्यों जरूरी?
नदी के किनारे लगातार बढ़ते अतिक्रमण और अवैध निर्माण के कारण हर साल बाढ़ के दौरान भारी नुकसान होता है। इसी को रोकने के लिए सरकार ने फ्लड प्लेन जोन चिन्हित कर निर्माण पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी के सर्वे के आधार पर यह योजना तैयार की गई है।
166 गांव होंगे प्रभावित
इस ठियाबंदी के दायरे में बरेली जिले की चार तहसीलों के गांव शामिल हैं—
- सदर: 52 गांव
- आंवला: 43 गांव
- फरीदपुर: 28 गांव
- मीरगंज: 43 गांव
इन सभी क्षेत्रों में अब नदी की जमीन पर पक्का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
💰 2.24 करोड़ का बजट, जल्द लगेंगे पिलर
इस योजना को लागू करने के लिए बाढ़ खंड मुरादाबाद को नोडल एजेंसी बनाया गया है। सरकार ने इसके लिए 2.24 करोड़ रुपये का बजट भी जारी कर दिया है। जल्द ही नदी किनारे पिलर लगाकर सीमांकन किया जाएगा, जिससे फ्लड प्लेन जोन स्पष्ट हो सके।
अवैध कॉलोनियों पर लगेगी रोक
रामगंगा किनारे कई जगहों पर प्राइवेट कॉलोनियां और प्लॉटिंग तेजी से बढ़ रही थी। इस नई व्यवस्था के बाद ऐसे अवैध निर्माण पर रोक लगेगी। प्रशासन का मानना है कि इससे बाढ़ से होने वाले नुकसान में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
बाढ़ नियंत्रण में मिलेगी मदद
हर साल बरसात में रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से आसपास के गांवों में पानी भर जाता है। ठियाबंदी लागू होने के बाद नदी के प्राकृतिक प्रवाह को सुरक्षित रखा जा सकेगा, जिससे बाढ़ नियंत्रण आसान होगा।