SIR कार्यक्रम की डेडलाइन बढ़ी: BLOs पर बढ़ते दबाव और आत्महत्या की घटनाओं के बाद बड़ा कदम
सोर्स। चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (Special Intensive Revision – SIR) के तहत चल रही वोटर लिस्ट की “सफाई” की अंतिम समय सीमा को बढ़ाकर अब 14 फरवरी 2026 कर दिया है। आयोग के इस कदम से देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची की ड्राफ्ट लिस्ट प्रकाशित करने की प्रक्रिया को एक सप्ताह का अतिरिक्त समय मिल गया है। यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की कड़ी आपत्तियाँ और बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) पर अत्यधिक दबाव की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं।

चुनाव आयोग द्वारा जारी तीन पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा गया है कि पहले निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वोटर लिस्ट की गिनती का कार्य 4 दिसंबर को समाप्त होना था और ड्राफ्ट लिस्ट 9 दिसंबर को प्रकाशित की जानी थी। लेकिन संशोधित कार्यक्रम के तहत अब यह गिनती 11 दिसंबर तक चलेगी, जबकि ड्राफ्ट लिस्ट की नई प्रकाशन तिथि 16 दिसंबर तय की गई है। वहीं अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी। आयोग के अनुसार, यह समय विस्तार जमीनी स्तर पर कार्य सुचारू रूप से निपटाने और किसी भी प्रकार की त्रुटियों को रोकने के उद्देश्य से दिया गया है।
इस पूरे मामले में विपक्षी दलों की भूमिका अहम रही। तृणमूल कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियों के कई नेताओं ने हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी। उन्होंने SIR प्रक्रिया को रीशेड्यूल करने की मांग करते हुए आयोग के सामने यह मुद्दा उठाया कि BLOs पर अत्यधिक दबाव है और इतनी कम समय सीमा में घर-घर जाकर मतदाता विवरण का सत्यापन करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। विपक्ष ने कहा कि इस प्रक्रिया की बेहतर तरीके से योजना बनाई जानी चाहिए ताकि कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक बोझ न पड़े।

हालात तब और गंभीर हो गए जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से BLOs की आत्महत्या की दुखद घटनाओं की रिपोर्ट सामने आईं। पश्चिम बंगाल में तो अगले वर्ष की शुरुआत में चुनाव होने हैं, ऐसे में इस प्रक्रिया का दबाव और अधिक बढ़ गया था। विपक्ष ने इन घटनाओं को SIR कार्यक्रम की अव्यवस्थित योजना का परिणाम बताया है और संसद के शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे पर भारी हंगामे की संभावना जताई जा रही है।
चुनाव आयोग ने यह स्वीकार किया कि मतदाता सूची के अद्यतन कार्य में सटीकता सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है और अधिकारियों को पर्याप्त समय देने से प्रक्रिया पारदर्शी और त्रुटिरहित होगी। आयोग का यह निर्णय BLOs को राहत देने वाला है और राज्यों को व्यवस्थित तरीके से मतदाता सूची तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय भी मिल जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय सीमा बढ़ने से मतदाता सूची में त्रुटियाँ कम होंगी और वास्तविक मतदाताओं के नाम शामिल किए जा सकेंगे, जिससे आगामी चुनावों में पारदर्शिता और विश्वसनीयता और भी मजबूत होगी।