पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई ने दावा किया है कि ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिनके बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। यूएई के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, एयर डिफेंस सिस्टम ने 12 बैलिस्टिक मिसाइलें, 3 क्रूज़ मिसाइलें और 4 ड्रोन इंटरसेप्ट किए। इस हमले में तीन लोगों के घायल होने की भी जानकारी दी गई है।
सीजफायर के बावजूद हमला क्यों अहम है?
सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से लागू युद्धविराम के बावजूद यह हमला सामने आया। यही वजह है कि इस घटनाक्रम को खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते अस्थिर माहौल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यूएई का कहना है कि हमले के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में धमाकों जैसी आवाजें सुनी गईं। अधिकारियों के अनुसार ये आवाजें मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही निष्क्रिय किए जाने के दौरान हुईं।
कितनी बड़ी थी हमले की तीव्रता?
यूएई रक्षा मंत्रालय के अनुसार हाल के महीनों में यह कोई पहली घटना नहीं है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक ईरानी हमलों के दौरान कुल 549 बैलिस्टिक मिसाइलें, 29 क्रूज़ मिसाइलें और 2,260 ड्रोन रोके जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि अब तक इन हमलों में 227 लोग घायल हुए हैं। कई देशों के नागरिक प्रभावित हुए हैं, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में मृतकों की संख्या भी बढ़ने की बात कही गई है।
UAE के अहम ठिकाने क्यों बने निशाना?
रिपोर्टों के मुताबिक फुजैरा क्षेत्र और ऊर्जा अवसंरचना को लेकर खास चिंता जताई जा रही है। फुजैरा यूएई के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह तेल निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति का अहम केंद्र है। विशेषज्ञ मानते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर जारी तनाव के बीच ऊर्जा ठिकानों पर दबाव बढ़ाना क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इसी कारण इस हमले का असर सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
ईरान ने क्या कहा?
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक ईरानी पक्ष ने सीधे तौर पर हमले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है। वहीं यूएई ने साफ किया है कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि भले ही औपचारिक रूप से सीजफायर कायम हो, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव अब भी बना हुआ है।
आगे क्या हो सकता है?
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। यदि ऐसे हमले जारी रहते हैं तो इसका असर न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और निवेश माहौल पर भी पड़ सकता है।