नई दिल्ली:
केंद्र सरकार ने अरावली पहाड़ियों को लेकर फैल रही उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि अरावली की परिभाषा बदलकर खनन की अनुमति दे दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत अरावली का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संरक्षित है और जब तक एक व्यापक प्रबंधन योजना को अंतिम रूप नहीं दिया जाता, तब तक नए खनन पट्टों पर पूरी तरह रोक बनी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
सरकार ने अपने बयान में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली पहाड़ियों की सुरक्षा को लेकर एकसमान मानदंड तय करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने माना है कि अनियंत्रित खनन देश की पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा बन सकता है, इसलिए संरक्षण से जुड़े नियमों में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जा सकती।
समिति का गठन क्यों हुआ?
सरकार के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में अरावली की अलग-अलग परिभाषाओं और नियमों के चलते भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। इसी वजह से मई 2024 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक समिति का गठन किया गया।
- समिति की अध्यक्षता पर्यावरण मंत्रालय के सचिव ने की
- इसमें दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के प्रतिनिधि शामिल हैं
इस समिति का उद्देश्य अरावली पहाड़ियों के लिए एक समान, वैज्ञानिक और व्यावहारिक परिभाषा तय करना है।
खनन से पहले क्या अनिवार्य होगा?
सरकार ने बताया कि समिति ने कई अहम सुझाव दिए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- किसी भी खनन गतिविधि से पहले अरावली पहाड़ियों को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक मानचित्रों में दर्ज करना
- मुख्य और निषिद्ध क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान, जहां खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा
- स्थानीय भू-आकृति के लिए वैज्ञानिक और वस्तुनिष्ठ मानदंड, ताकि सभी राज्यों में नियमों का एकसमान पालन हो सके
समिति ने यह भी सिफारिश की है कि 500 मीटर के भीतर स्थित पहाड़ियाँ एक पर्वत श्रृंखला मानी जाएंगी और उनका संरक्षण सामूहिक रूप से किया जाना चाहिए।
कितना क्षेत्र खनन के दायरे में?
सरकार ने जिला स्तरीय विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया कि:
- राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में वैध खनन
- अरावली क्षेत्र के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का सिर्फ 0.19 प्रतिशत हिस्सा ही प्रभावित करता है
- दिल्ली के पांच अरावली जिलों में किसी भी प्रकार का खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है
असली खतरा क्या है?
सरकार ने साफ कहा कि अरावली के लिए सबसे बड़ा खतरा अवैध और अनियमित खनन है। इससे निपटने के लिए समिति ने:
- कड़ी निगरानी और सख्त प्रवर्तन
- ड्रोन, सैटेलाइट और आधुनिक निगरानी तकनीकों के इस्तेमाल
- अवैध खनन पर त्वरित कार्रवाई
की सिफारिश की है।
सरकार का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य न सिर्फ अरावली का संरक्षण करना है, बल्कि पर्यावरण संतुलन और भविष्य की पीढ़ियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करना है।