India-Bangladesh Water Treaty News
बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद सत्ता संभालने वाले मोहम्मद यूनुस के रुख ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है। चीन और पाकिस्तान के साथ नजदीकियां, भारत विरोधी बयान और उकसावे वाली राजनीति के बीच एक बार फिर फरक्का बैराज और गंगा जल समझौते पर चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूनुस अच्छी तरह जानते हैं कि भारत की सहमति के बिना बांग्लादेश की जल और आर्थिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, ठीक उसी तरह जैसे पाकिस्तान आज भी सिंधु जल संधि को लेकर भारत से खफा रहता है।
भारत के हाथ में बांग्लादेश की जल-लाइफलाइन
गंगा नदी भारत से निकलकर बांग्लादेश में पद्मा कहलाती है।
- खेती
- पीने का पानी
- पर्यावरण और उद्योग
इन सबके लिए लाखों बांग्लादेशी गंगा पर निर्भर हैं।
अगर भारत और बांग्लादेश के रिश्ते गंभीर रूप से बिगड़ते हैं, तो फरक्का बैराज से जुड़े फैसले ढाका के लिए अस्तित्व का सवाल बन सकते हैं।
गंगा जल समझौता क्या है?
- वर्ष: 1996
- अवधि: 30 वर्ष (2026 तक)
- हस्ताक्षरकर्ता:
- भारत: एच.डी. देवगौड़ा
- बांग्लादेश: शेख हसीना
यह समझौता शुष्क मौसम में फरक्का बैराज पर उपलब्ध पानी के बंटवारे का स्पष्ट फार्मूला तय करता है।
फरक्का बैराज एग्रीमेंट क्या है?
- स्थान: मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल
- बांग्लादेश सीमा से दूरी: ~18 किमी
- कुल गेट: 112
- उद्देश्य:
- कोलकाता बंदरगाह को गाद से बचाना
- लगभग 40,000 क्यूसेक पानी को फरक्का नहर में मोड़ना
यह एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जबकि गंगा जल ट्रीटी एक कूटनीतिक समझौता।
Indus Water Treaty से क्या सबक मिलता है?
यहां पाकिस्तान का उदाहरण बेहद अहम हो जाता है।
सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty)
- वर्ष: 1960
- भारत और पाकिस्तान के बीच
- मध्यस्थ: विश्व बैंक
इस संधि के तहत भारत को
- रावी, ब्यास, सतलुज
और पाकिस्तान को - सिंधु, झेलम, चिनाब
नदियों का पानी मिला।
पाकिस्तान क्यों है भारत से नाराज़?
पिछले कुछ वर्षों में जब-जब
- भारत ने किशनगंगा
- रतले
- पकल दुल
जैसी परियोजनाओं पर काम तेज किया, पाकिस्तान ने
- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शिकायत
- भारत पर “जल युद्ध” का आरोप
- सिंधु जल संधि उल्लंघन के दावे
शुरू कर दिए।
भारत का साफ कहना है कि
👉 वह संधि के भीतर रहकर ही अपने अधिकारों का उपयोग कर रहा है।
बांग्लादेश के लिए चेतावनी क्यों है पाकिस्तान का केस?
विशेषज्ञ मानते हैं कि
- जिस तरह पाकिस्तान सिंधु जल संधि के बावजूद भारत पर निर्भर है
- उसी तरह बांग्लादेश गंगा जल के बिना टिक नहीं सकता
अगर भारत ने
- तकनीकी
- कानूनी
- कूटनीतिक
स्तर पर सख्ती दिखाई, तो ढाका की स्थिति इस्लामाबाद जैसी हो सकती है।
भारत गेट खोल दे या पानी रोके तो क्या होगा?
- बाढ़ या सूखे का खतरा
- खेती चौपट
- पीने के पानी की भारी किल्लत
- लाखों लोगों का जीवन प्रभावित
यही वजह है कि जल कूटनीति भारत का सबसे बड़ा गैर-सैन्य हथियार मानी जाती है।
2026: निर्णायक साल
- गंगा जल समझौता 2026 में खत्म
- सिंधु जल संधि पर पहले से पाकिस्तान नाराज़
- बांग्लादेश में भारत विरोधी सरकार
इन तीनों कारणों से जल राजनीति दक्षिण एशिया का सबसे संवेदनशील मुद्दा बन चुकी है।