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Chicken Neck पर चीन की एंट्री? तीस्ता के बाद गंगा पर नया बराज, यूनुस का जिनपिंग के सामने दिया बयान बढ़ा भारत का टेंशन

India-Bangladesh Ganga Water Treaty News

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के जल बंटवारे का मुद्दा एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस के हालिया कदमों और चीन के बढ़ते दखल ने नई दिल्ली की चिंताएं बढ़ा दी हैं। तीस्ता नदी के बाद अब पद्मा (गंगा) नदी पर नया बैराज बनाने की बांग्लादेश की योजना को भारत के खिलाफ रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है।

चिकन नेक के पास चीन की हलचल

सबसे बड़ी चिंता सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) को लेकर है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष देश से जोड़ने वाला एकमात्र जमीनी रास्ता है। हाल ही में चीन के राजदूत याओ वेन ने उत्तरी बांग्लादेश के रंगपुर क्षेत्र और तीस्ता नदी परियोजना का दौरा किया, जो चिकन नेक के बेहद करीब है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब यूनुस सरकार चीन को रणनीतिक प्रोजेक्ट्स में खुलकर न्योता दे रही है।

जिनपिंग के सामने ‘7 सिस्टर्स’ वाला बयान

मार्च 2025 में बीजिंग दौरे के दौरान मोहम्मद यूनुस ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को ‘7 सिस्टर्स’ बताते हुए उन्हें लैंडलॉक्ड क्षेत्र कहा था। इस बयान को भारत की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति की ओर चीन का ध्यान खींचने की कोशिश माना गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह महज बयान नहीं, बल्कि एक सोची-समझी भू-राजनीतिक सिग्नलिंग थी।

गंगा (पद्मा) पर नया बैराज क्यों अहम?

बांग्लादेश ने पद्मा नदी पर नए बैराज की योजना को आगे बढ़ाने की तैयारी कर ली है।

  • यह परियोजना करीब 50,443 करोड़ टका (₹37,836 करोड़) की है
  • मानसून के अतिरिक्त पानी को स्टोर कर सालभर जल आपूर्ति इसका उद्देश्य है
  • पद्मा, भारत से बांग्लादेश में प्रवेश के बाद गंगा का ही रूप है

यह कदम ऐसे वक्त पर उठाया गया है जब 1996 की फरक्का जल संधि इस साल समाप्त होने जा रही है और उसका नवीनीकरण अब तक नहीं हो सका है।

फरक्का संधि पर अटकी बात

1996 में हुई गंगा जल संधि 30 साल के लिए थी, जिसकी मियाद 2026 में खत्म हो रही है।

  • बांग्लादेश चाहता है शुष्क मौसम में गारंटीड जल प्रवाह
  • भारत जलवायु परिवर्तन, घरेलू जरूरतों और पश्चिम बंगाल की मांगों के चलते संशोधन चाहता है

इन मतभेदों के बीच पद्मा पर नया बैराज भारत पर निर्भरता खत्म करने की बांग्लादेश की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत की सुरक्षा चिंताएं क्यों बढ़ीं?

चीन की भागीदारी केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं मानी जा रही।

  • लालमोनिरहाट एयरबेस को अपग्रेड करने में चीन की दिलचस्पी
  • तीस्ता मास्टर प्लान में पहले से चीनी साझेदारी
  • चिकन नेक के पास चीनी गतिविधियां

इन सबने भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक नया रणनीतिक तनाव पैदा कर दिया है।

👀 भारत रखे हुए है पैनी नजर

भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। जानकारों का मानना है कि अगर जल परियोजनाओं के बहाने चीन की मौजूदगी बढ़ी, तो इसका असर केवल जल कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ जाएगा।

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