मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अब Bab el-Mandeb Strait भारत के लिए नई चिंता बनकर उभरा है। Strait of Hormuz पहले से ही संकट में है, और अब अगर बाब अल-मंदेब भी बाधित होता है, तो वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
क्या है ‘आंसुओं का द्वार’?
Bab el-Mandeb Strait को अरबी में ‘आंसुओं का द्वार’ कहा जाता है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम मार्ग है। यह स्ट्रेट जिबूती और यमन के बीच स्थित है और Suez Canal तक पहुंचने का मुख्य रास्ता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह रूट?
भारत का लगभग 95% व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। इसमें से बड़ा हिस्सा Bab el-Mandeb Strait के रास्ते यूरोप और उत्तरी अफ्रीका तक जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत का करीब 50% निर्यात और 30% आयात इसी मार्ग से होता है। इसके अलावा, यूरोप के साथ भारत का 80% व्यापार भी इसी रास्ते पर निर्भर है।
हूती विद्रोहियों से बढ़ा खतरा
यमन के Houthi rebels ने इस रूट को बंद करने की धमकी दी है। ये विद्रोही ईरान समर्थित माने जाते हैं और पहले भी कई वाणिज्यिक जहाजों पर हमले कर चुके हैं। 2023 से अब तक ये समूह ड्रोन और मिसाइलों के जरिए 100 से ज्यादा जहाजों को निशाना बना चुका है। हाल ही में इजरायल पर हमलों के बाद इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
30% तेल सप्लाई पर खतरा
अगर Strait of Hormuz और Bab el-Mandeb Strait दोनों बाधित होते हैं, तो दुनिया की करीब 30% तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ेगा।
महंगा होगा व्यापार और बढ़ेगी महंगाई
अगर जहाजों को Cape of Good Hope के रास्ते जाना पड़ा, तो सफर 12 से 15 दिन लंबा हो जाएगा। इससे ईंधन लागत 40% तक बढ़ सकती है और इसका असर वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। फल, सब्जियों और जरूरी सामानों की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा।
पहले भी बाधित हो चुका है यह रूट
इतिहास में Bab el-Mandeb Strait कई बार संकट का सामना कर चुका है। 1973 के युद्ध, सोमालियाई समुद्री डकैती और यमन संघर्ष के दौरान यह मार्ग प्रभावित रहा है।
क्या आने वाला है बड़ा संकट?
मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए यह समय सतर्क रहने और वैकल्पिक व्यापार मार्गों पर विचार करने का है।