उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई, जब बहुजन समाज पार्टी के तीन वरिष्ठ नेताओं के निष्कासन की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। लेकिन बसपा प्रमुख मायावती ने खुद सामने आकर इन खबरों को पूरी तरह फर्जी करार दिया है।
फर्जी लेटर से फैली भ्रम की स्थिति
मायावती ने अपने आधिकारिक X पोस्ट में स्पष्ट किया कि मेवालाल गौतम, मुनकाद अली और नौशाद अली को पार्टी से निकाले जाने की खबरें गलत हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रेस विज्ञप्ति बुलंदशहर के जिलाध्यक्ष के नाम से जारी एक जाली लेटरपैड पर बनाई गई थी, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।
मायावती की मीडिया और जनता से अपील
बसपा सुप्रीमो ने मीडिया और आम जनता से अपील की कि ऐसी अपुष्ट और फर्जी खबरों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है, ताकि गलत जानकारी फैलने से रोका जा सके।
किन नेताओं को लेकर था विवाद?
सोशल मीडिया पर वायरल खबरों में दावा किया गया था कि मेवालाल गौतम, मुनकाद अली और नौशाद अली को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। हालांकि मायावती ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह “फेक न्यूज” बताया।
एक दिन पहले 2 नेताओं पर हुई थी कार्रवाई
गौरतलब है कि एक दिन पहले बसपा ने जयप्रकाश सिंह और धर्मवीर अशोक पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते कार्रवाई करते हुए उन्हें निष्कासित किया था। इसी के बाद यह भ्रम और ज्यादा फैल गया कि अन्य नेताओं को भी पार्टी से बाहर कर दिया गया है।
चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी हलचल
2027 विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ऐसे में इस तरह की खबरें और भी तेजी से फैलती हैं और सियासी माहौल को प्रभावित करती हैं।