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पाकिस्तान की ‘पीस ब्रोकर’ छवि पर सवाल

एक ओर पाकिस्तान खुद को ईरान और अमेरिका के बीच शांति स्थापित करने वाला देश बताने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसकी सैन्य कार्रवाई ने उसकी छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा घटनाक्रम में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है।

कुनार में हमला, छात्रों की मौत

अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में हुए हमले ने हालात को और बिगाड़ दिया है। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 70 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में बड़ी संख्या छात्रों की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है।
तालिबान सरकार ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने मोर्टार और रॉकेट से हमला किया, जिससे रिहायशी इलाके और शैक्षणिक संस्थान प्रभावित हुए।

अफगानिस्तान का कड़ा रुख

अफगानिस्तान ने इस हमले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। तालिबान के प्रवक्ता ने इसे सीधे तौर पर देश की संप्रभुता पर हमला बताया है। इसके साथ ही अफगान विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव को साफ तौर पर दर्शाता है।

पाकिस्तान का इनकार

वहीं पाकिस्तान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उसका कहना है कि उसकी कार्रवाई केवल खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकियों के खिलाफ की जाती है। पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने सीमा के पास अफगान चौकियों को निशाना बनाया, न कि आम नागरिकों को।

चीन की बढ़ी परेशानी

इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चिंता चीन को हो रही है। चीन लंबे समय से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच स्थिरता बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC), जो उसके बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का अहम हिस्सा है।
अगर दोनों देशों के बीच संघर्ष बढ़ता है, तो इस परियोजना की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसके अलावा अफगानिस्तान में अस्थिरता बढ़ने से उग्रवाद का खतरा भी बढ़ सकता है, जिसका असर चीन के शिनजियांग क्षेत्र तक पहुंच सकता है।

बढ़ता सीमा तनाव, खतरे में शांति

पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कई बार संघर्ष हुआ है। हालांकि बीच-बीच में सीजफायर भी हुआ, लेकिन वह ज्यादा समय तक टिक नहीं पाया।
ताजा घटनाएं दिखाती हैं कि क्षेत्र में स्थायी शांति अभी भी दूर है और अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ सकता है।

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