पंजाब की राजनीति में दल-बदल को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर राघव चड्ढा समेत छह राज्यसभा सदस्यों की सदस्यता रद्द करने की मांग उठाई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान दिल्ली में पंजाब के विधायकों के साथ राष्ट्रपति भवन पहुंचे और राष्ट्रपति को एक हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में दल-बदल को लोकतांत्रिक जनादेश के खिलाफ बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई।
राष्ट्रपति से क्या मांग की गई?
मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि पंजाब में भाजपा के पास सीमित विधायक होने के बावजूद राज्यसभा सदस्यों की संख्या में बदलाव लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की कि दल-बदल करने वाले राज्यसभा सदस्यों की सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाए। भगवंत मान ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को पार्टी बदलने से पहले इस्तीफा देकर नया जनादेश लेना चाहिए।
सीएम मान ने क्या कहा?
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए भगवंत मान ने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक मामला नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि असंवैधानिक तरीके से राजनीतिक दलों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। सीएम मान ने कहा कि ऐसे कदम जनादेश का अपमान हैं और पंजाब की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।
‘ऑपरेशन लोटस’ पर साधा निशाना
भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन लोटस’ जैसे प्रयास पंजाब में सफल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग विश्वासघात बर्दाश्त नहीं करते। सीएम मान ने दावा किया कि पंजाब की जनता लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हर स्तर पर जवाब देगी।
राजनीतिक संदेश कितना बड़ा?
इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ कानूनी पहल नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। राष्ट्रपति भवन तक मुद्दा ले जाकर आम आदमी पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह दल-बदल के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज हो सकता है, क्योंकि इस मुद्दे का असर पंजाब की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय विपक्षी राजनीति पर भी पड़ सकता है।