प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने पांच देशों के दौरे की शुरुआत यूएई से की, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। अबू धाबी पहुंचने पर यूएई के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan ने खुद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उनके विमान को यूएई के लड़ाकू विमानों ने एस्कॉर्ट भी किया।

पश्चिम एशिया में शांति पर भारत का बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति के साथ बैठक में कहा कि भारत पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए हरसंभव सहयोग देने को तैयार है। उन्होंने यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि किसी भी देश को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है।
पीएम मोदी ने होर्मुज़ स्ट्रेट में सुरक्षित समुद्री आवाजाही की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल क्षेत्रीय स्थिरता ही नहीं बल्कि दुनिया की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए भी बेहद अहम है।
रक्षा सहयोग में नई रणनीतिक साझेदारी
भारत और यूएई के बीच इस दौरे में रणनीतिक रक्षा साझेदारी के ढांचे पर महत्वपूर्ण समझौता हुआ। दोनों देशों ने एडवांस रक्षा तकनीक के संयुक्त विकास, खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
इसके अलावा साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और संयुक्त अभ्यास को भी मजबूत करने का फैसला लिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत और यूएई के संबंधों को नई ऊंचाई देगा।

तेल और एलपीजी सप्लाई पर बड़े समझौते
भारत और यूएई के बीच ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई अहम समझौते हुए। दोनों देशों ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बढ़ाने पर सहमति बनाई। मौजूदा 5.5 मिलियन बैरल क्षमता को बढ़ाकर 30 मिलियन बैरल तक ले जाने की योजना है।
इसके साथ ही एलपीजी सप्लाई को लेकर इंडियन ऑयल और एडीएनओसी के बीच समझौता हुआ। भारत की लगभग 40 प्रतिशत घरेलू एलपीजी जरूरत यूएई से पूरी होती है। इस समझौते से भारतीय उपभोक्ताओं को वैश्विक कीमतों के उतार-चढ़ाव से राहत मिलने की उम्मीद है।

भारत में 5 अरब डॉलर निवेश का ऐलान
यूएई की कई बड़ी संस्थाओं ने भारत में कुल 5 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की है। इसमें बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंस सेक्टर शामिल हैं।
एमिरेट्स एनबीडी भारत के आरबीएल बैंक में 3 अरब डॉलर निवेश करेगा, जबकि अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में 1 अरब डॉलर लगाएगी। इसके अलावा इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी सम्मान कैपिटल में भी बड़ा निवेश करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार यह निवेश भारत-यूएई आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा और भारत की विकास योजनाओं को गति देगा।