प्रधानमंत्री Narendra Modi विदेश दौरे से लौटते ही एक बार फिर पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रहे हैं। गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्र सरकार की अहम मंत्रिपरिषद बैठक होने जा रही है। करीब 11 महीने बाद आयोजित हो रही इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हैं, खासकर संभावित कैबिनेट फेरबदल और बड़े नीतिगत फैसलों को लेकर।
4 से 5 घंटे चल सकती है बैठक
सूत्रों के मुताबिक यह हाई-प्रोफाइल बैठक करीब 4 से 5 घंटे तक चल सकती है। बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री शामिल होंगे। इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, पिछले फैसलों के असर और आने वाली योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
सरकार के कई अहम मंत्रालय इस बैठक में अपने प्रजेंटेशन पेश करेंगे। इनमें ऊर्जा, वित्त, रेलवे, वाणिज्य, कृषि, श्रम, सड़क परिवहन, वन एवं पर्यावरण और परमाणु ऊर्जा जैसे मंत्रालय शामिल हैं। मंत्रालयों के सचिव पिछले दो वर्षों में किए गए सुधारों और उपलब्धियों की रिपोर्ट भी पेश करेंगे।
मिडिल ईस्ट संकट पर रहेगा खास फोकस
बैठक में मिडिल ईस्ट के मौजूदा संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। खासतौर पर ऊर्जा, विमानन, कृषि और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर बढ़ते दबाव को देखते हुए नई रणनीति बनाई जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, आयात-निर्यात और महंगाई पर पड़ सकता है। ऐसे में केंद्र सरकार पहले से ही तैयारियों में जुट गई है।
सरकार के अगले एजेंडे पर मिल सकता है संकेत
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी सरकार के आने वाले एजेंडे को लेकर भी दिशा-निर्देश दे सकते हैं। माना जा रहा है कि आर्थिक सुधार, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश बढ़ाने पर सरकार का विशेष जोर रहेगा। इसके अलावा राज्यों के साथ बेहतर समन्वय और विकास योजनाओं की रफ्तार बढ़ाने पर भी चर्चा हो सकती है।
हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद यह पहली बड़ी मंत्रिपरिषद बैठक है, इसलिए इसके राजनीतिक मायने भी काफी अहम माने जा रहे हैं।
कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज
दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। हालांकि सरकार की ओर से इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि बैठक के बाद कुछ बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक फैसले सामने आ सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की यह बैठक आने वाले महीनों में केंद्र सरकार की रणनीति और प्राथमिकताओं की तस्वीर साफ कर सकती है।