नई दिल्ली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है। हाल के महीनों में रुपया 97 के करीब पहुंच गया था, जिससे यह आशंका जताई जाने लगी थी कि कहीं भारतीय मुद्रा 100 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक न पहुंच जाए। हालांकि अब भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के कुछ बड़े कदमों के बाद स्थिति बदलती नजर आ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI की नई नीतियों से देश में 50 से 75 अरब डॉलर तक का विदेशी निवेश आ सकता है, जिससे रुपये को मजबूती मिलने की संभावना बढ़ गई है।
डॉलर के मुकाबले कहां पहुंचा रुपया?
शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.18 के स्तर पर बंद हुआ। इससे पहले यह 97 के करीब पहुंच गया था, जिसने बाजार में चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और RBI की नई रणनीति के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ता दिखाई दे रहा है।
75 अरब डॉलर निवेश की उम्मीद
विशेषज्ञ संस्थानों का मानना है कि RBI द्वारा उठाए गए कदम विदेशी निवेशकों को भारत की ओर आकर्षित कर सकते हैं।
- SBI Research के अनुसार भारत में कम से कम 40 अरब डॉलर का नया निवेश आ सकता है।
- Kotak Securities का अनुमान है कि यह आंकड़ा 50 से 75 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो रुपये को मजबूत समर्थन मिलेगा और डॉलर के मुकाबले इसकी स्थिति बेहतर हो सकती है।
RBI के 4 बड़े फैसले
1. सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश को बढ़ावा
RBI ने फुली एक्सेसिबल रूट यानी FAR के दायरे को बढ़ाते हुए लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड को शामिल किया है। इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए भारत में निवेश करना अधिक आकर्षक होगा।
2. NRI निवेश नियम आसान
अनिवासी भारतीयों और OCI कार्डधारकों के लिए निवेश से जुड़े नियमों को सरल बनाया गया है। इससे विदेशी भारतीयों का निवेश भारत की ओर बढ़ सकता है।
3. डॉलर जमा पर विशेष सुविधा
FCNR-B जमा योजनाओं में RBI ने हेजिंग लागत का खर्च खुद उठाने का फैसला किया है। इससे बैंक अधिक आकर्षक ब्याज दरें दे सकेंगे और विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ सकता है।
4. निर्यातकों के लिए नई समयसीमा
निर्यात से मिलने वाली विदेशी मुद्रा को भारत लाने की समय सीमा 15 महीने से घटाकर 9 महीने कर दी गई है। इससे डॉलर जल्दी भारतीय बाजार में आएंगे और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी।
क्या रुपया 100 तक पहुंचेगा?
रुपये के 100 प्रति डॉलर तक गिरने की आशंकाओं पर RBI ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मौजूदा आर्थिक आधार इतने कमजोर नहीं हैं कि ऐसी स्थिति पैदा हो। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेश बढ़ता है तो रुपया फिर से 92 से 93 के स्तर तक मजबूत हो सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
RBI के हालिया फैसले यह संकेत देते हैं कि केंद्रीय बैंक रुपये को स्थिर रखने और विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। आने वाले महीनों में विदेशी निवेश, वैश्विक डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल की कीमतें रुपये की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।