नई दिल्ली।
देशभर में E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इथेनॉल नीति का जोरदार बचाव करते हुए कहा कि इस योजना से उन्हें कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं होता। गडकरी ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
उन्होंने यह भी कहा कि E20 नीति किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं, बल्कि व्यापक सरकारी और तकनीकी विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई राष्ट्रीय नीति है।
‘मेरी हिस्सेदारी केवल 0.07 प्रतिशत है’
एक टीवी इंटरव्यू में नितिन गडकरी ने कहा कि उनके परिवार का चीनी उद्योग से जुड़ा व्यवसाय काफी पहले से है और इथेनॉल उत्पादन में उनकी हिस्सेदारी केवल 0.07 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि इतनी छोटी हिस्सेदारी से किसी प्रकार का बड़ा आर्थिक लाभ संभव नहीं है। इसलिए यह आरोप पूरी तरह निराधार हैं कि उन्होंने व्यक्तिगत फायदे के लिए इथेनॉल नीति बनाई।
E20 नीति का उद्देश्य क्या है?
गडकरी के अनुसार E20 नीति का मुख्य लक्ष्य भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता कम करना है। उन्होंने बताया कि देश में वर्तमान समय में लगभग 550 इथेनॉल उत्पादन इकाइयों के माध्यम से करीब 1,500 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इथेनॉल के अधिक उपयोग से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे, पर्यावरण को लाभ होगा और देश का विदेशी मुद्रा खर्च भी कम होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार केवल इथेनॉल ही नहीं बल्कि अन्य वैकल्पिक ईंधनों को भी बढ़ावा दे रही है।
वाहनों के नुकसान के दावों पर क्या बोले गडकरी?
E20 पेट्रोल से वाहनों को नुकसान पहुंचने की आशंकाओं पर गडकरी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के वाहन को वास्तव में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से नुकसान हुआ है तो वह संबंधित डीलर या परिवहन मंत्रालय में शिकायत दर्ज करा सकता है।
उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर उसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आलोचकों से सवाल किया कि क्या उनके पास ऐसा कोई प्रमाण है जिससे यह साबित हो कि E20 के कारण किसी वाहन को नुकसान हुआ है।
ऑटो कंपनियों का भी किया जिक्र
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मारुति सुजुकी, टोयोटा, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी प्रमुख वाहन कंपनियों ने E20 ईंधन से वाहन खराब होने की कोई शिकायत सरकार को नहीं दी है।
उन्होंने हाल ही में चर्चा में आए एक टोयोटा वाहन के मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि जांच में वाहन की खराबी का कारण इथेनॉल नहीं बल्कि ईंधन में पानी की मिलावट पाया गया था।
पुराने वाहनों को लेकर चिंता बरकरार
हालांकि सरकार का कहना है कि E20 से वाहनों को नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन वाहन मालिकों और कुछ विशेषज्ञों के बीच पुराने वाहनों की अनुकूलता और माइलेज को लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं।
सरकार का कहना है कि सभी वाहन निर्माता कंपनियां लंबे परीक्षण और लाखों किलोमीटर की जांच के बाद ही किसी ईंधन को मंजूरी देती हैं।