बारीक नक्काशी और आकर्षक डिजाइन से बढ़ी मांग, सावन में कारोबार को मिली नई रफ्तार
मुरादाबाद। पीतल नगरी के नाम से प्रसिद्ध मुरादाबाद एक बार फिर अपने पारंपरिक हस्तशिल्प के कारण चर्चा में है। यहां तैयार की जा रही बारीक नक्काशी वाली पीतल की भगवान गणेश की प्रतिमाएं देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। आकर्षक डिजाइन, उत्कृष्ट कारीगरी और मजबूत गुणवत्ता के कारण इन प्रतिमाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। सावन के पावन महीने में इनकी बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है।
बारीक नक्काशी ने बनाया खास
मुरादाबाद के पीतल कारोबारी किशन खन्ना के अनुसार, उनके यहां कई तरह के पीतल उत्पाद बनाए जाते हैं, लेकिन इस बार तैयार की गई गणेश प्रतिमाओं पर बेहद बारीक और आकर्षक नक्काशी की गई है। यही विशेषता इन्हें अन्य मूर्तियों से अलग पहचान दिला रही है। हर प्रतिमा को पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक डिजाइन का सुंदर मिश्रण बनाकर तैयार किया जाता है।
हर जरूरत के अनुसार उपलब्ध हैं प्रतिमाएं
कारीगर ग्राहकों की मांग के अनुसार विभिन्न आकारों में गणेश प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। ये प्रतिमाएं लगभग 3 इंच से लेकर कई फीट ऊंचाई तक उपलब्ध हैं। ग्राहक अपनी पसंद के डिजाइन और आकार के अनुसार विशेष ऑर्डर भी दे सकते हैं। इन प्रतिमाओं का उपयोग घरों, मंदिरों, कार्यालयों और सजावट के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
विदेशों से बढ़ रही मांग
मुरादाबाद की पीतल गणेश प्रतिमाओं की लोकप्रियता अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच चुकी है। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों सहित कई स्थानों से ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं। विशेष रूप से विदेशों में रहने वाले भारतीय और सनातन धर्म से जुड़े लोग इन प्रतिमाओं को अपने घरों और मंदिरों के लिए पसंद कर रहे हैं। इससे स्थानीय कारीगरों और कारोबारियों को भी अच्छा लाभ मिल रहा है।
1000 रुपये से शुरू होती है कीमत
इन प्रतिमाओं की शुरुआती कीमत लगभग 1000 रुपये है। प्रतिमा के आकार, डिजाइन और नक्काशी के अनुसार इसकी कीमत कई हजार रुपये तक पहुंच जाती है। सावन के दौरान धार्मिक आयोजनों और पूजा-पाठ के कारण इनकी बिक्री में तेजी आई है। कारोबारियों का कहना है कि वर्षभर इन प्रतिमाओं की मांग बनी रहती है, लेकिन सावन और गणेश उत्सव के समय बिक्री कई गुना बढ़ जाती है।
स्थानीय कारीगरों को मिल रहा रोजगार
पीतल उद्योग मुरादाबाद की पहचान और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गणेश प्रतिमाओं की बढ़ती मांग से स्थानीय कारीगरों को रोजगार मिल रहा है और पारंपरिक हस्तशिल्प को भी नई पहचान मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात को और बढ़ावा मिला तो मुरादाबाद की पीतल कला वैश्विक बाजार में और मजबूत स्थान बना सकती है।