नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में विधायक खरीद-फरोख्त के आरोपों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा उनकी सरकार गिराने के लिए विधायकों को 20 से 30 करोड़ रुपये का ऑफर दिए जाने के आरोप के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए मुख्यमंत्री को 24 घंटे के भीतर सबूत पेश करने या सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की चुनौती दी है।
क्या है पूरा मामला?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दावा किया था कि उनकी सरकार को अस्थिर करने के उद्देश्य से कुछ विधायकों को कथित तौर पर 20 से 30 करोड़ रुपये तक का ऑफर दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में भाजपा से जुड़े एक वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट के वकील का नाम सामने आया है।
इन आरोपों के बाद राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई और भाजपा ने इसे गंभीर लेकिन आधारहीन आरोप करार दिया।
सुधांशु त्रिवेदी का पलटवार
दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को बिना किसी प्रमाण के इस तरह के आरोप नहीं लगाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि उमर अब्दुल्ला के पास कोई ऑडियो, वीडियो, दस्तावेज या अन्य ठोस सबूत है तो उसे तुरंत जांच एजेंसियों के सामने पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि जिस वरिष्ठ वकील का जिक्र किया गया है, उसका नाम सार्वजनिक किया जाए।
24 घंटे का अल्टीमेटम
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यदि अगले 24 घंटे के भीतर कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जाता, तो यह माना जाएगा कि आरोप केवल राजनीतिक बयानबाजी के लिए लगाए गए थे।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि बिना सबूत के किसी राजनीतिक दल और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों की छवि खराब करना उचित नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर भाजपा कानूनी कार्रवाई पर भी विचार कर सकती है।
‘बीजेपी लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बनाती है’
उमर अब्दुल्ला द्वारा लगाए गए “पिछले दरवाजे से सरकार बनाने” के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी है और वह जनता के जनादेश के आधार पर सरकार बनाने में विश्वास रखती है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में विकास, रोजगार और युवाओं के भविष्य को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया है। ऐसे में राजनीतिक असफलताओं को छिपाने के लिए इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है।
अब किस पर टिकी हैं निगाहें?
भाजपा के इस आक्रामक जवाब के बाद अब सभी की नजर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर है। यदि वे अपने आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत करते हैं, तो मामला नई दिशा ले सकता है। वहीं यदि ऐसा नहीं होता है, तो यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह सकता है।
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और आने वाले दिनों में यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।
नोट: यह खबर संबंधित नेताओं के सार्वजनिक बयानों और दावों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।