नई चुनौती के सामने दुनिया
पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। ईरान-अमेरिका तनाव के बीच अब लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी संघर्ष के केंद्र बनते जा रहे हैं। यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। इस घटना ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंताएं बढ़ा दी हैं।
हूती विद्रोहियों का दावा, सऊदी ने एक हमले की पुष्टि की
हूती संगठन के अनुसार, ‘एन्सेलिया’ और ‘लैला’ नामक दो तेल टैंकरों को क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया गया। संगठन का दावा है कि दोनों जहाजों में आग लग गई। वहीं सऊदी अरब ने आधिकारिक रूप से केवल एक जहाज पर हुए हमले की पुष्टि की है। सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार जहाज के अगले हिस्से में आग लगी, लेकिन चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं और जहाज को सुरक्षित करने की कार्रवाई की गई।
होर्मुज के बाद बाब-अल-मंदेब बना नया संकट
अब तक दुनिया की निगाहें होर्मुज जलडमरूमध्य पर थीं, जहां ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई थी। अब बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी संकट में घिरता दिख रहा है। यह समुद्री मार्ग एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच व्यापार का बेहद महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है। यदि दोनों समुद्री मार्ग लंबे समय तक प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक शिपिंग लागत और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है।
2022 के समझौते के बावजूद नहीं सुधरे हालात
रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2022 में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच एक समझौते का रोडमैप तैयार किया गया था। इसके बावजूद यमन के कई क्षेत्रों में आर्थिक और राजनीतिक तनाव बना रहा। विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक दबाव और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण हालात दोबारा बिगड़ गए हैं, जिससे समुद्री सुरक्षा पर भी असर पड़ रहा है।
पाकिस्तान की बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहेगा। क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा समीकरणों के चलते पाकिस्तान सहित कई देशों पर कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है। हालांकि किसी भी देश के सीधे युद्ध में शामिल होने को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि या स्पष्ट संकेत नहीं हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
यदि लाल सागर और होर्मुज दोनों समुद्री मार्गों में लंबे समय तक तनाव बना रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे परिवहन, व्यापार और महंगाई पर भी असर पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।