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अखिलेश यादव के निर्देश पर 9 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल 25 जुलाई को रामपुर जाएगा, डीएम से करेगा मुलाकात

जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर सपा का बड़ा कदम

रामपुर। जौहर यूनिवर्सिटी को दिए गए ध्वस्तीकरण नोटिस के बाद समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। विधायकों के प्रतिनिधिमंडल के बाद अब पार्टी ने सांसदों का नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रामपुर भेजने का फैसला किया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर यह प्रतिनिधिमंडल 25 जुलाई को रामपुर पहुंचेगा और जिला प्रशासन से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी लेगा।

डीएम से मिलेगी सांसदों की टीम

समाजवादी पार्टी के अनुसार, सांसदों का प्रतिनिधिमंडल रामपुर के जिलाधिकारी से मुलाकात करेगा और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े पूरे प्रकरण पर चर्चा करेगा। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपेगा। पार्टी का कहना है कि वह यूनिवर्सिटी पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई को रोकने की मांग उठाएगी।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल होंगे ये सांसद

सपा की ओर से गठित नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में मुरादाबाद सांसद रुचि वीरा, इकरा हसन, हरेंद्र सिंह मलिक, राजीव राय, मोहिबुल्लाह नदवी, नीरज मौर्य और जियाउर्रहमान बर्क सहित अन्य सांसद शामिल हैं। रामपुर जिलाध्यक्ष को इस प्रतिनिधिमंडल के साथ समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्थानीय पार्टी नेताओं को भी इस दौरे में शामिल किया जाएगा।

पहले भी पहुंच चुका है विधायकों का दल

इससे पहले 23 जुलाई को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के विधायकों का प्रतिनिधिमंडल भी रामपुर पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल में करीब 45 नेता शामिल थे। पार्टी ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे शिक्षा और छात्रों के हितों से जुड़ा मुद्दा बताया था।

क्या है पूरा मामला?

रामपुर प्रशासन के अनुसार, जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों का निर्माण स्वीकृत नक्शे के बिना किया गया है। प्रशासन ने संबंधित पक्ष को 15 दिन के भीतर स्वयं निर्माण हटाने का नोटिस जारी किया है। निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है।

अब आगे क्या होगा?

जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर प्रशासन और समाजवादी पार्टी आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। एक ओर प्रशासन नियमों के पालन की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सपा इसे शिक्षा और छात्रों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कार्रवाई रोकने की मांग कर रही है। अब सभी की निगाहें 25 जुलाई को होने वाली प्रतिनिधिमंडल और जिला प्रशासन की बैठक पर टिकी हैं।

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