नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही, डेटा सुरक्षा और डिजिटल मंचों के नियमन को लेकर संसद की स्थायी समिति ने बड़ा कदम उठाया है। संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने Meta (फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप), Google, X (पूर्व में ट्विटर) और Snapchat के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए तलब किया है। समिति इन कंपनियों से उपयोगकर्ताओं की निजता, ऑनलाइन सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनाए जा रहे उपायों पर जवाब मांगेगी।
संसदीय समिति करेगी सवाल-जवाब
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नियमन से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करना है।
समिति यह जानना चाहती है कि सोशल मीडिया कंपनियां महिलाओं, बच्चों, किसानों, ग्रामीण नागरिकों, श्रमिकों और आम लोगों की निजता तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठा रही हैं।
डेटा प्राइवेसी और सार्वजनिक व्यवस्था पर रहेगा फोकस
बैठक में विशेष रूप से डेटा सुरक्षा, यूज़र प्राइवेसी, फर्जी सूचनाओं की रोकथाम, ऑनलाइन सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में सोशल मीडिया कंपनियों की भूमिका पर चर्चा होने की संभावना है। समिति यह भी समझना चाहती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स सरकारी नियमों और भारतीय कानूनों का किस प्रकार पालन कर रहे हैं।
हालिया घटनाओं के बीच अहम बैठक
यह बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है जब हाल के महीनों में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का व्यापक उपयोग देखने को मिला है। डिजिटल माध्यमों के जरिए बड़ी संख्या में लोगों तक सूचनाएं पहुंचाने और अभियानों को संगठित करने की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज रही है।
इसी पृष्ठभूमि में संसद की यह समीक्षा बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
किन कंपनियों को बुलाया गया?
बैठक के लिए Meta, Google, X और Snapchat के प्रतिनिधियों के अलावा MeitY तथा गृह मंत्रालय के अधिकारियों को भी बुलाया गया है। बैठक में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की नीतियों, कंटेंट मॉडरेशन, डेटा संरक्षण और भारतीय कानूनों के अनुपालन पर विस्तार से चर्चा होगी।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर भविष्य में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नए दिशा-निर्देश या नियामकीय बदलावों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, किसी संभावित नीति परिवर्तन को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।