मुरादाबाद। रामगंगा नदी एक बार फिर पर्यावरण संकट की चेतावनी देती नजर आई। शुक्रवार सुबह नदी के विभिन्न घाटों के पास बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां तैरती हुई देखी गईं, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और देखते ही देखते वहां भीड़ जमा हो गई। कुछ लोग मरी मछलियों को पकड़ते हुए भी नजर आए।
प्रदूषण और ऑक्सीजन की कमी बनी वजह?
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, रामगंगा नदी में लगातार बढ़ रहा जल प्रदूषण और घुलनशील ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) का खतरनाक स्तर तक गिरना मछलियों की मौत का प्रमुख कारण हो सकता है। नदी का जलस्तर पहले से ही काफी कम है। प्री-मानसून के दौरान पानी का स्तर थोड़ा बढ़ा जरूर था, लेकिन इसका कोई खास फायदा जलीय जीव-जंतुओं को नहीं मिल सका।
जलस्तर में उतार-चढ़ाव से बिगड़ा संतुलन
विशेषज्ञों का कहना है कि जलस्तर में बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। इससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा लगातार घट रही है, जो मछलियों सहित अन्य जलीय जीवों के लिए घातक साबित हो रही है।
रसायनिक पदार्थ डालकर अवैध शिकार की आशंका
इस घटना को लेकर एक और गंभीर आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व रासायनिक पदार्थ डालकर मछलियों का अवैध शिकार कर सकते हैं। इससे बड़ी संख्या में मछलियों की अचानक मौत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हर साल दोहराई जा रही है यह घटना
गौरतलब है कि रामगंगा नदी में हर वर्ष इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी के पानी की तत्काल जांच कराई जाए और यदि रसायनिक प्रदूषण या अवैध शिकार की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, रामगंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए स्थायी समाधान की जरूरत बताई जा रही है।
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