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क्या ट्रंप की रजामंदी से भारत को मिलेगा वेनेजुएला का तेल? रिलायंस ने अमेरिका से मांगी मंजूरी

Reliance Venezuela Oil | India Oil Supply | Donald Trump | US Sanctions

भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज एक बार फिर वैश्विक तेल राजनीति के केंद्र में आ गई है। पश्चिमी देशों के दबाव और रूसी तेल की खरीद पर बढ़ती सख्ती के बीच रिलायंस अब वेनेजुएला से कच्चा तेल (Crude Oil) आयात करने की तैयारी में है। इसके लिए कंपनी ने सीधे तौर पर अमेरिका से मंजूरी मांगी है।

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA से दोबारा तेल खरीदने के लिए अमेरिकी प्रशासन से ग्रीन सिग्नल चाहती है।

क्यों अमेरिका की मंजूरी जरूरी?

दरअसल, वेनेजुएला पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध (US Sanctions) के कारण वहां से तेल खरीदने के लिए अमेरिकी विदेश विभाग और ट्रेजरी डिपार्टमेंट की अनुमति जरूरी होती है। सूत्रों के अनुसार, रिलायंस के वरिष्ठ अधिकारी इस मुद्दे पर US State Department और Treasury Department से लगातार संपर्क में हैं।

रूसी तेल पर दबाव, नए विकल्प की तलाश

भारत पर भारी-भरकम टैरिफ और पश्चिमी दबाव के चलते रिलायंस को रूस से तेल आयात कम या बंद करना पड़ा है। ऐसे में कंपनी चाहती है कि उसकी रिफाइनरियों, खासकर जामनगर स्थित दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स, के लिए कच्चे तेल की सप्लाई बाधित न हो।

वेनेजुएला के तेल पर क्यों टिकी नजर?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार 30 से 50 मिलियन बैरल तेल निकालकर अमेरिका भेजेगी, जिसे बाद में बाजार भाव पर बेचा जाएगा। इसी नीति के तहत अब रिलायंस भी वेनेजुएला से तेल खरीदने की संभावनाएं टटोल रही है।

पहले भी मिल चुका है लाइसेंस

गौरतलब है कि रिलायंस को 2025 की शुरुआत में अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद वेनेजुएला से तेल आयात का विशेष लाइसेंस मिला था। PDVSA के रिकॉर्ड के अनुसार, उस दौरान रिलायंस को करीब 63,000 बैरल प्रतिदिन की सप्लाई की गई थी। हालांकि, मई 2025 में भारत के लिए आखिरी तेल कार्गो पहुंचा।

फिर क्यों रुकी सप्लाई?

मार्च और अप्रैल 2025 के बीच अमेरिका ने PDVSA के अधिकांश बिजनेस पार्टनर्स के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए और वेनेजुएला के तेल खरीदारों को टैरिफ की धमकी दी। इसके बाद से रिलायंस समेत कई कंपनियों की सप्लाई प्रभावित हुई।

तेल कंपनियों में होड़

रिलायंस अकेली कंपनी नहीं है। शेवरॉन, विटोल और ट्राफिगुरा जैसी दिग्गज अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियां भी वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए अमेरिकी मंजूरी पाने की कोशिश में जुटी हैं। आने वाले दिनों में ट्रंप व्हाइट हाउस में तेल कंपनियों के टॉप एग्जीक्यूटिव्स से मुलाकात कर सकते हैं।

फिलहाल, वेनेजुएला में लाखों बैरल कच्चा तेल टैंकों और जहाजों में फंसा हुआ है, और दुनिया की नजर अमेरिका के अगले फैसले पर टिकी है।

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