पेरिस। Geopolitics Explained के तहत वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका को लेकर बड़ा संकेत सामने आया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने खुलकर स्वीकार किया है कि भारत आज एक उभरती नहीं, बल्कि संतुलन बनाने वाली सुपरपावर बन चुका है। मैक्रों का मानना है कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में सिर्फ भारत ही ऐसा देश है, जो दुनिया को दो धड़ों में बंटने से रोक सकता है। यही वजह है कि फ्रांस भारत की भूमिका को लेकर लगातार “गुहार” लगा रहा है।
2026: जियो-पॉलिटिक्स का टर्निंग पॉइंट
मैक्रों ने पेरिस में राजदूतों के सम्मेलन के दौरान कहा कि साल 2026 वैश्विक राजनीति के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
- 2026 में G7 की अध्यक्षता फ्रांस करेगा
- उसी साल BRICS की अध्यक्षता भारत के पास होगी
इन दोनों मंचों पर भारत की मौजूदगी और नेतृत्व उसे दुनिया का ऐसा केंद्र बनाती है, जो पश्चिमी देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच ‘ग्लोबल ब्रिज’ की भूमिका निभा सकता है।
क्यों सिर्फ भारत ही बन सकता है ‘ग्लोबल ब्रिज’?
मैक्रों के बयान के पीछे तीन बड़े कारण माने जा रहे हैं, जिन्हें भारत के ‘ट्रंप कार्ड’ कहा जा रहा है:
1️⃣ किसी का गुलाम नहीं: भारत की स्वतंत्र विदेश नीति
मैक्रों ने साफ कहा कि भारत जैसे देश किसी के पिछलग्गू नहीं बनते। भारत की स्वतंत्र विदेश नीति उसे अमेरिका, रूस और चीन—तीनों से संतुलित संबंध रखने की ताकत देती है। यही रणनीतिक स्वायत्तता भारत को वैश्विक मंच पर खास बनाती है।
2️⃣ G7 का पार्टनर और BRICS का फाउंडर
भारत दुनिया का इकलौता देश है, जो
- G7 का पार्टनर भी है
- और BRICS का फाउंडिंग मेंबर भी
फ्रांस चाहता है कि भारत इन दोनों शक्तिशाली मंचों को एक-दूसरे से जोड़े, ताकि दुनिया ‘पश्चिम बनाम बाकी’ की लड़ाई में न फंसे।
3️⃣ टकराव नहीं, संवाद की नीति
चाहे रूस-यूक्रेन युद्ध हो या इजरायल-हमास संघर्ष, भारत ने हमेशा संवाद और कूटनीति पर जोर दिया है। मैक्रों का मानना है कि भारत की यही ‘बुद्ध की राह’ दुनिया को संभावित तीसरे विश्व युद्ध से बचा सकती है।
अमेरिका पर परोक्ष निशाना
मैक्रों ने अपने भाषण में अमेरिका को लेकर भी सख्त टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका
- अपने ही बनाए नियमों को तोड़ रहा है
- और मित्र देशों पर भी दबाव बना रहा है
साथ ही उन्होंने चीन के आक्रामक व्यापारिक विस्तार को यूरोप के लिए खतरा बताया। यही वजह है कि फ्रांस अब अमेरिका-केंद्रित विश्व व्यवस्था के बजाय संतुलित और बहुध्रुवीय दुनिया चाहता है, जहां भारत अहम भूमिका निभाए।
भारत दौरे की तैयारी में मैक्रों
फ्रांस के राष्ट्रपति फरवरी 2026 में भारत दौरे पर आ रहे हैं। वे नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और AI Impact Summit में हिस्सा लेंगे। इस दौरान
- रक्षा सहयोग (राफेल डील)
- स्पेस और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप
- और 2026 के वैश्विक एजेंडे
पर अहम चर्चा होने की संभावना है।
निष्कर्ष
फ्रांस की नजर में भारत अब सिर्फ एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक संतुलन का केंद्र है। यही वजह है कि भारत के ये तीन ‘ट्रंप कार्ड’ अमेरिका को भी सीमाओं में रहने पर मजबूर कर सकते हैं और दुनिया को बंटने से बचा सकते हैं।