नई दिल्ली: भारत द्वारा अमेरिकी दालों पर 30 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के फैसले से अमेरिका में हलचल मच गई है। चूंकि भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और वैश्विक खपत का करीब 27 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत में होता है, ऐसे में यह फैसला अमेरिकी किसानों और निर्यातकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। भारत के इस कदम के बाद अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेन्स नई दिल्ली पहुंचे और उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की।
भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया और म्यांमार जैसे देशों से मटर, मूंग, अरहर और मसूर जैसी दालों का आयात करता है। हाल ही में अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के जवाब में भारत ने 1 नवंबर से अमेरिकी पीले मटर पर 30% आयात शुल्क लागू कर दिया था।
🇺🇸 भारत के फैसले से अमेरिका को बड़ा झटका
भारत के इस फैसले से अमेरिका खासा नाराज है, क्योंकि कृषि उत्पादों—खासतौर पर दालों—के लिए भारत उसका एक अहम बाजार है। इसे लेकर मोंटाना के रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेन्स और नॉर्थ डकोटा के सीनेटर केविन क्रेमर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर चिंता जताई थी। पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर बात कर टैरिफ कम कराने की मांग की थी।
इसी सिलसिले में रविवार को नई दिल्ली में सीनेटर स्टीव डेन्स ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। बैठक में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार संबंधों और उनके रणनीतिक महत्व पर भी चर्चा हुई।
अमेरिकी किसानों को हो रहा नुकसान
अमेरिकी सीनेटरों ने अपने पत्र में बताया कि मोंटाना और नॉर्थ डकोटा अमेरिका में दलहन फसलों के शीर्ष उत्पादक राज्य हैं। भारत द्वारा लगाए गए 30% टैरिफ के चलते इन राज्यों के किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
भारतीय बाजार में अमेरिकी हाई-क्वालिटी दलहन उत्पाद अब महंगे हो गए हैं, जिससे उन्हें अन्य देशों के निर्यातकों के मुकाबले प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से आग्रह किया है कि भारत के साथ किसी भी ट्रेड डील या बातचीत के दौरान इस मुद्दे को प्राथमिकता से उठाया जाए।