नई दिल्ली:
India–EU Free Trade Agreement (FTA) को लेकर वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुई ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील पर अब अमेरिका खुलकर नाराज नजर आ रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने यूरोपीय संघ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसने यूक्रेन युद्ध के बीच अपने घोषित सिद्धांतों से ज्यादा व्यापारिक हितों को तरजीह दी है।
इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि भारत-EU ट्रेड डील केवल आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि ग्लोबल पावर बैलेंस को प्रभावित करने वाला फैसला बन चुकी है।
🔹 अमेरिका क्यों हुआ नाराज?
CNBC को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि—
- यूरोपीय संघ सार्वजनिक मंचों पर यूक्रेन के समर्थन की बात करता है
- लेकिन व्यवहार में व्यापारिक फायदे को प्राथमिकता देता है
- भारत-EU ट्रेड डील इसी दोहरे रवैये का उदाहरण है
उनके मुताबिक, यह यूरोप के लिए नैतिक और रणनीतिक रूप से निराशाजनक फैसला है।
🔹 भारत-EU फ्री ट्रेड डील में क्या है खास?
भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी 2026 को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की वार्ताएं पूरी होने की आधिकारिक घोषणा की।
इस समझौते की प्रमुख बातें—
- यूरोपीय संघ भारत से आने वाले 99.5% उत्पादों पर टैरिफ हटाएगा
- अधिकांश वस्तुओं पर शुल्क तुरंत शून्य हो जाएगा
- भारत भी कुल व्यापार मूल्य के 97.5% हिस्से पर टैरिफ में रियायत देगा
- समझौते पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और EU ट्रेड कमिश्नर मारोश शेफचोविच ने हस्ताक्षर किए
यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, EU प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मौजूदगी में नई दिल्ली में हुआ।
🔹 अमेरिका को भारत पर टैरिफ न लगाने से भी आपत्ति
स्कॉट बेसेंट ने यह भी दावा किया कि—
- यूरोपीय संघ ने पिछले साल भारत पर हाई टैरिफ लगाने के अमेरिकी फैसले का समर्थन नहीं किया
- वजह यह थी कि यूरोप भारत के साथ ट्रेड डील को अंतिम रूप देना चाहता था
अमेरिका का मानना है कि इसी कारण EU, वॉशिंगटन के साथ मजबूती से खड़ा नहीं हुआ।
🔹 यूक्रेन युद्ध को भारत से कैसे जोड़ा गया?
अमेरिकी बयान में सबसे विवादित आरोप यही रहा। बेसेंट ने कहा कि—
- रूस का कच्चा तेल भारत पहुंचता है
- भारत में रिफाइन होकर वही तेल उत्पाद यूरोप खरीदता है
- इस प्रक्रिया से यूरोप अप्रत्यक्ष रूप से रूस को आर्थिक लाभ पहुंचा रहा है
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह यूरोपीय देश खुद अपने खिलाफ चल रहे युद्ध को ही फंड कर रहे हैं।
🔹 ग्लोबल पॉलिटिक्स में भारत की बढ़ती भूमिका
भारत-EU FTA को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेमचेंजर डील माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार—
- भारत अब केवल उपभोक्ता बाजार नहीं रहा
- वह वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बन रहा है
- अमेरिका-यूरोप-चीन के बीच भारत एक रणनीतिक संतुलन शक्ति के रूप में उभर रहा है
यही वजह है कि इस डील ने अमेरिका को असहज कर दिया है।
🔹 क्या बदल रहा है वैश्विक समीकरण?
इस पूरे घटनाक्रम ने यह संकेत दे दिए हैं कि—
- वैश्विक व्यापार अब राजनीतिक ब्लॉक्स से आगे बढ़ रहा है
- देश अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं
- भारत अब “फॉलोअर” नहीं, बल्कि रूल-मेकर की भूमिका में दिख रहा है