नई दिल्ली। कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में न्यायपालिका और भ्रष्टाचार से जुड़े चैप्टर को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में तीखी सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणियां करते हुए इसे “कैल्कुलेटिव मूव” और “गहरी साजिश” तक बताया।
मामला राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा प्रकाशित कक्षा 8 की किताब ‘Exploring Society: India and Beyond’ के एक चैप्टर से जुड़ा है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित टिप्पणियों का जिक्र किया गया है।
“न्यायपालिका भ्रष्ट है, क्या संदेश जाएगा?”
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि अगर छात्रों को यह सिखाया जाएगा कि भारतीय न्यायपालिका भ्रष्ट है, तो इससे समाज में क्या संदेश जाएगा? उन्होंने कहा कि यह कंटेंट केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षकों, अभिभावकों और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगा।
चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि किताब की कुछ प्रतियां बाजार और सोशल मीडिया में उपलब्ध हैं, भले ही सरकार ने उन्हें वापस लेने की बात कही हो।
जिम्मेदारी तय होगी, केस बंद नहीं करेंगे
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि “हल्की सजा देकर नहीं छोड़ा जा सकता।” कोर्ट ने संकेत दिया कि वह इस मामले में गहराई से जांच चाहता है और जब तक संतुष्ट नहीं होगा, सुनवाई जारी रहेगी।
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि संबंधित किताबों को वापस ले लिया गया है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
“संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा से खिलवाड़”
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि किताब में न्यायपालिका के इतिहास और लोकतंत्र की रक्षा में उसकी भूमिका का समुचित उल्लेख नहीं है। CJI ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह संस्थागत गरिमा को कमजोर करने की कोशिश है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट आलोचना को दबाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन संस्थागत संतुलन और जिम्मेदारी का पालन होना चाहिए।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह मामले की विस्तृत जांच कराएगा और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान की जाएगी। अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि NCERT और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।