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पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ किया ‘Open War’ का ऐलान, रक्षा मंत्री बोले– अब हमारा सब्र खत्म हो चुका है!

इस्लामाबाद/काबुल | अंतरराष्ट्रीय डेस्क

Pakistan और Afghanistan के बीच सीमा पर तनाव अब खुली जंग की स्थिति में पहुंचता दिख रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Muhammad Asif ने बयान दिया है कि दोनों देशों के बीच अब “ओपन वॉर” की स्थिति है और पाकिस्तान का सब्र जवाब दे चुका है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच हवाई हमलों और बॉर्डर झड़पों का दौर जारी है।

क्या है ताजा घटनाक्रम?

रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के काबुल, कंधार और पक्तिया प्रांत में हवाई हमले किए। इस्लामाबाद का दावा है कि इन हमलों में आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया और कई लोग मारे गए।

इसके जवाब में अफगान तालिबान सरकार ने पाकिस्तान की सीमा पर सैन्य ठिकानों पर हमला करने का दावा किया है। अफगान पक्ष का कहना है कि उन्होंने कई पाकिस्तानी पोस्ट को निशाना बनाया और भारी नुकसान पहुंचाया।

दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे को भारी क्षति पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, हालांकि स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

ड्रोन अटैक से बढ़ा तनाव

अफगानिस्तान की ओर से इस्लामाबाद के पास ड्रोन हमले की खबरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय से कुछ किलोमीटर दूर तक धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इससे पाकिस्तान के पावर कॉरिडोर में हलचल मच गई है।

‘अब खुला युद्ध’ – रक्षा मंत्री

ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा:

“अब हमारा सब्र खत्म हो चुका है। अब हमारे बीच खुला युद्ध छिड़ गया है।”

उन्होंने संकेत दिया कि पाकिस्तान अब सख्त सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

डूरंड लाइन और TTP का विवाद

दोनों देशों के बीच विवाद की जड़ डूरंड रेखा है, जिसे अफगानिस्तान आधिकारिक सीमा के रूप में मान्यता नहीं देता। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन से Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) और बलूच अलगाववादी समूह हमले कर रहे हैं।

अक्टूबर 2025 में कतर की मध्यस्थता से सीजफायर हुआ था, लेकिन इसके बाद भी छिटपुट हमले जारी रहे। अब ताजा घटनाक्रम ने उस समझौते को लगभग निष्प्रभावी बना दिया है।

क्षेत्रीय और वैश्विक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है। दोनों देश पहले ही आर्थिक और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में खुली जंग की स्थिति क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस संघर्ष पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक हस्तक्षेप से हालात काबू में लाए जा सकते हैं या तनाव और बढ़ेगा।

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