पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत ने खाड़ी देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब संयुक्त अरब अमीरात, कतर और सऊदी अरब जैसे अहम साझेदार देशों के साथ लगातार उच्चस्तरीय संपर्क बनाए हुए है।
यूएई दौरे पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी
भारत की इस सक्रिय कूटनीतिक रणनीति के तहत विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 7 मई को संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग और पश्चिम एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और यूएई दोनों ने मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों को देखते हुए आपसी सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत पर सहमति जताई।
व्यापार और निवेश पर खास फोकस
यूएई दौरे के दौरान विक्रम मिसरी ने यूएई की मंत्री रीम अल हाशिमी और खालदून अल मुबारक से मुलाकात की। बातचीत में व्यापार और निवेश के अलावा रक्षा, फिनटेक, हेल्थकेयर और नई तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
भारत के लिए खाड़ी देश केवल ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से ही नहीं, बल्कि निवेश, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से भी बेहद अहम माने जाते हैं। ऐसे में यह दौरा दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
कतर और सऊदी अरब से भी लगातार संवाद
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का खाड़ी देशों के साथ लगातार हाई लेवल संपर्क बना हुआ है। इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी यूएई का दौरा कर चुके हैं।
भारत ने कतर और सऊदी अरब जैसे अन्य महत्वपूर्ण खाड़ी देशों के साथ भी अपने संवाद को जारी रखा है। माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता के बीच भारत अपने पुराने और भरोसेमंद साझेदारों के साथ रिश्तों को और गहरा करना चाहता है।
भारत-फ्रांस-यूएई त्रिपक्षीय साझेदारी को नई मजबूती
विक्रम मिसरी ने भारत-फ्रांस-यूएई त्रिपक्षीय बैठक में भी हिस्सा लिया। इस बैठक में फ्रांस के वरिष्ठ अधिकारी मार्टिन ब्रिएन्स भी मौजूद रहे।
तीनों देशों ने साझा रणनीतिक हितों, समुद्री सुरक्षा, निवेश, तकनीकी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा की। साथ ही आने वाले समय के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी, जिससे त्रिपक्षीय साझेदारी को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
क्यों अहम है यह कूटनीतिक सक्रियता
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की यह सक्रिय कूटनीति बेहद महत्वपूर्ण है। खाड़ी देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक हितों और विदेश नीति के प्रमुख स्तंभ हैं।
ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है, भारत का यूएई, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ संबंध मजबूत करना आने वाले वर्षों में रणनीतिक रूप से काफी अहम साबित हो सकता है।