मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक रणनीति पर आज संसद में अहम बयान आने वाला है। विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar सोमवार को Lok Sabha में ईरान पर Israel और United States की संयुक्त कार्रवाई के बाद बने हालात पर सरकार का आधिकारिक रुख स्पष्ट करेंगे।
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू हो रहा है और पहले ही दिन पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्ष ने सरकार से सवाल किया है कि अगर ईरान-इजरायल संघर्ष बढ़ता है तो भारत की रणनीति क्या होगी और खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
भारत का क्या है रुख?
विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar संसद को बताएंगे कि भारत इस संकट को लेकर संयम, संवाद और कूटनीति के रास्ते पर विश्वास करता है। भारत का रुख लंबे समय से यही रहा है कि पश्चिम एशिया के सभी पक्ष बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाएं।
सरकार की प्राथमिकता तीन प्रमुख मुद्दों पर रहेगी:
- खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा
- ऊर्जा आपूर्ति और तेल आयात पर प्रभाव
- क्षेत्रीय शांति के लिए कूटनीतिक प्रयास
भारत के लिए मध्य-पूर्व का क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां लाखों भारतीय काम करते हैं और देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है।
संसद में क्यों हो सकता है हंगामा?
बजट सत्र के दूसरे चरण में विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। विपक्षी दलों ने पश्चिम एशिया संकट के अलावा अमेरिकी टैरिफ नीति और घरेलू राजनीतिक मुद्दों को भी उठाने का संकेत दिया है।
इसके साथ ही विपक्ष ने Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी पेश किया है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर करीब 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं और Trinamool Congress समेत कई विपक्षी दल इसका समर्थन कर रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा अध्यक्ष ने पहले चरण में विपक्षी सांसदों को पर्याप्त बोलने का मौका नहीं दिया। हालांकि सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक कदम बता रहा है।
भारत के सामने क्या हैं बड़ी चुनौतियां?
ईरान-इजरायल संघर्ष अगर बढ़ता है तो भारत के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
मुख्य चिंताएं:
- तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी
- खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा
- वैश्विक कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना
- अमेरिका और पश्चिम एशिया के देशों के साथ संबंध
इसी वजह से आज संसद में विदेश मंत्री का बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत का संतुलित कूटनीतिक रुख दुनिया की नजर में अहम माना जाता है। संसद में आज होने वाली बहस से साफ होगा कि भारत इस संकट को लेकर आगे किस रणनीति पर काम करेगा।