वॉशिंगटन से लेकर काराकास तक इस वक्त एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का हश्र भी इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन जैसा होगा?
अमेरिका द्वारा मादुरो की गिरफ्तारी और सत्ता से बेदखली के बाद जिस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, उन्होंने 2003 के इराक युद्ध और सद्दाम हुसैन के पतन की यादें ताजा कर दी हैं।
अमेरिका ने फिर बदला इतिहास?
अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश है और वह पहले भी कई बार दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में दखल देकर सत्ता की दिशा बदल चुका है। अब उसी सूची में वेनेजुएला का नाम जुड़ गया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने खुलकर दावा किया है कि मादुरो को सत्ता से हटाकर वेनेजुएला की कमान अब अमेरिका के प्रभाव में होगी। मादुरो पर गंभीर आरोप तय किए जा चुके हैं और सजा की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही जा रही है।
2003 की परछाईं: सद्दाम हुसैन वाला पैटर्न
साल 2003 में अमेरिका ने इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के खिलाफ सैन्य हमला किया था। पहले उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर “राक्षस” के रूप में पेश किया गया, फिर ‘विनाशकारी हथियार’ और ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ का नैरेटिव बनाया गया।
अब वही रणनीति मादुरो के मामले में दोहराई जा रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार हथियार बना है—नार्को टेररिज्म। अमेरिका ने मादुरो को ड्रग कार्टेल का सरगना बताकर वैश्विक समर्थन तैयार किया।
डेल्टा फोर्स, रात का हमला और राष्ट्रपति की गिरफ्तारी
सद्दाम हुसैन को अमेरिकी स्पेशल फोर्स डेल्टा फोर्स ने ‘ऑपरेशन रेड डॉन’ के तहत एक अंधेरी सुरंग से पकड़ा था।
मादुरो के मामले में भी वही डेल्टा फोर्स आगे रही। इस ऑपरेशन को नाम दिया गया—‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’।
रात करीब 2 बजे अमेरिकी कमांडो सीधे राष्ट्रपति के निजी आवास में दाखिल हुए और मादुरो को उनकी पत्नी के साथ हिरासत में ले लिया गया। यह दृश्य बिल्कुल वैसा ही था, जैसा दुनिया ने सद्दाम की गिरफ्तारी के वक्त देखा था।
असली वजह: तेल का खेल
इन दोनों ऑपरेशनों के पीछे असली कारण तेल माना जा रहा है।
इराक तेल का बड़ा उत्पादक था और सद्दाम डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती दे रहा था।
वहीं, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है। ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में अरबों डॉलर का निवेश करेंगी और ऑपरेशन का खर्च तेल से वसूला जाएगा।
अब आगे क्या?
सद्दाम हुसैन को इराक की अदालत में ट्रायल के बाद फांसी दी गई थी, जिसे दुनिया ने दिखावटी करार दिया।
मादुरो को उनके देश में नहीं, बल्कि न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में पेश किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मादुरो को फांसी की संभावना कम है, लेकिन उम्रकैद लगभग तय मानी जा रही है। एक बात साफ है—अमेरिका उन्हें दोबारा सत्ता में लौटने का कोई मौका नहीं देगा।
दुनिया को संदेश
सद्दाम हुसैन को फांसी देकर अमेरिका ने कभी मिडिल ईस्ट को संदेश दिया था।
अब मादुरो को बेड़ियों में जकड़कर ट्रंप ने चीन, रूस, क्यूबा और उत्तर कोरिया जैसे देशों को अपनी ताकत का संकेत दे दिया है।