मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump की धमकी पर Iran ने कड़ा पलटवार किया है। ईरान के शीर्ष नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर United States ने Benjamin Netanyahu की नीति अपनाई, तो पूरा क्षेत्र विनाशकारी संघर्ष में बदल सकता है।
ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव
ट्रंप ने हाल ही में Strait of Hormuz को लेकर ईरान को सख्त चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर निर्धारित समय सीमा तक जलडमरूमध्य नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा ढांचे और पुलों पर हमला किया जा सकता है। इस बयान में अपशब्दों के इस्तेमाल को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया।
ईरान का तीखा पलटवार
ईरानी संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने अमेरिका की नीति को “लापरवाह” बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम पूरे क्षेत्र को बड़े और विनाशकारी संघर्ष की ओर धकेल सकते हैं। गालिबफ ने आरोप लगाया कि वॉशिंगटन इजरायल के दबाव में काम कर रहा है और इससे हालात और बिगड़ रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने आक्रामक रुख जारी रखा तो इसका असर हर देश और परिवार पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती बयानबाजी क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव का संकेत हो सकती है।
6 अप्रैल तक दिया गया अल्टीमेटम
ट्रंप ने पहले ईरान को 6 अप्रैल तक का समय दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर समझौता नहीं हुआ और होर्मुज मार्ग नहीं खोला गया तो अमेरिका कड़े कदम उठा सकता है। इस चेतावनी ने ऊर्जा बाजार और वैश्विक राजनीति में चिंता बढ़ा दी है।
कूटनीतिक बयानबाजी और तेज
थाईलैंड स्थित ईरानी दूतावास ने भी ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की भाषा किसी राष्ट्राध्यक्ष के लिए उचित नहीं है। वहीं ईरान के सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उसके बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ तो “दुश्मनों के लिए जहन्नुम के दरवाजे खुल जाएंगे।”
वैश्विक असर की आशंका
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर तनाव बढ़ता है तो तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। होर्मुज मार्ग से दुनिया की बड़ी ऊर्जा सप्लाई गुजरती है, ऐसे में संघर्ष बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।