कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के अयोध्या स्थित राम मंदिर दर्शन को लेकर सियासत तेज हो गई है। साफ हो गया है कि राहुल गांधी अयोध्या नहीं जाएंगे। इसे लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है और पार्टी को हिंदू विरोधी करार दिया है, जबकि कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक प्रोपेगैंडा बताया है।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी का राम मंदिर जाने का कोई कार्यक्रम कभी तय ही नहीं था। पहले से तय राजनीतिक और संगठनात्मक कार्यक्रमों के कारण वे अयोध्या जाने वाली किसी भी टीम में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि “राहुल गांधी को मंदिर न जाने को लेकर जिस तरह का नैरेटिव बनाया जा रहा है, वह पूरी तरह भ्रामक और राजनीतिक मकसद से प्रेरित है।”
पहले से तय हैं राहुल गांधी के कार्यक्रम
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी गुरुवार को मनरेगा मजदूरों से मुलाकात करेंगे, जो नए कानूनों के चलते समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा 23 जनवरी को केरल में पार्टी की एक अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसमें विधानसभा चुनाव की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
पार्टी ने यह भी कहा कि राहुल गांधी देशभर में कई बड़े धार्मिक स्थलों और मंदिरों के दर्शन कर चुके हैं और उनकी आस्था पर सवाल उठाना अनुचित है। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी को भाजपा से किसी तरह के धार्मिक प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है।
भाजपा का पलटवार
इस बीच भाजपा नेता और प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और गांधी परिवार का इतिहास हिंदू आस्था के विरोध से जुड़ा रहा है। भंडारी ने कहा कि कांग्रेस ने राम मंदिर निर्माण का विरोध किया, भगवान राम को काल्पनिक बताया और अब भी अयोध्या या महाकुंभ जैसे धार्मिक आयोजनों से दूरी बनाए रखती है।
भाजपा का कहना है कि चुनाव नजदीक आने पर ही राहुल गांधी को राम याद आते हैं, जबकि उनकी मूल सोच में हिंदू आस्था के लिए कोई सम्मान नहीं है।
सियासत के केंद्र में राम मंदिर
राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। जहां भाजपा इसे आस्था और पहचान से जोड़कर देख रही है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी का फोकस बेरोजगारी, मजदूरों की समस्याएं और चुनावी रणनीति पर है, न कि भाजपा द्वारा तय किए गए एजेंडे पर।