Russia Ukraine War Talks in UAE
रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में एक अहम कूटनीतिक पहल अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में शुरू हो गई है। अबू धाबी में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय वार्ता का आगाज़ हो चुका है। यह पहली बार है जब रूस और यूक्रेन आमने-सामने बैठकर बातचीत कर रहे हैं। इस बैठक को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समर्थित शांति योजना से जोड़कर देखा जा रहा है।
🇷🇺 पुतिन की सबसे बड़ी डिमांड
वार्ता शुरू होते ही रूस ने अपना रुख साफ कर दिया।
क्रेमलिन ने दो टूक कहा है कि डोनबास क्षेत्र से यूक्रेनी सेना की वापसी उसकी सबसे अहम शर्त है और इस पर कोई समझौता नहीं होगा।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस अपने पुराने स्टैंड से पीछे हटने वाला नहीं है।
🇺🇦 जेलेंस्की को किस बात का डर?
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस वार्ता को एक “महत्वपूर्ण कदम” बताया, लेकिन साथ ही नतीजों को लेकर संदेह भी जताया।
- जेलेंस्की ने कहा कि डोनबास मुद्दा बातचीत का केंद्र रहेगा
- उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत शांति की ओर बढ़ेगी
- लेकिन यह भी माना कि रास्ता आसान नहीं होगा
यूक्रेन फिलहाल डोनबास के करीब 20% हिस्से पर नियंत्रण बनाए हुए है और वह इस इलाके को छोड़ने के लिए तैयार नहीं दिखता।
🇺🇸 ट्रंप की शांति योजना की अग्निपरीक्षा
यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब
- ट्रंप की दावोस में जेलेंस्की से मुलाकात हो चुकी है
- अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ पुतिन से रूस में बातचीत कर चुके हैं
अब सवाल यही है—
👉 क्या ट्रंप पुतिन की शर्तें मानने के लिए यूक्रेन को मना पाएंगे?
👉 या यह वार्ता भी पिछली कोशिशों की तरह बेनतीजा रह जाएगी?
दो दिन चलेगी बातचीत, UAE बना न्यूट्रल ग्राउंड
UAE ने बताया है कि यह त्रिपक्षीय वार्ता दो दिनों तक चलेगी।
अबू धाबी को एक न्यूट्रल मंच के तौर पर चुना गया है, जहां बिना दबाव के राजनीतिक समाधान तलाशने की कोशिश की जाएगी।
कौन-कौन शामिल?
- यूक्रेन प्रतिनिधिमंडल:
- नेतृत्व: रक्षा मंत्री रुस्तम उमेरोव
- वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक अधिकारी शामिल
- रूस की ओर से:
- GRU खुफिया प्रमुख इगोर कोस्त्युकोव
- आर्थिक दूत किरिल दिमित्रीव (अमेरिकी अधिकारियों से अलग बातचीत संभव)
क्या युद्ध खत्म होने की उम्मीद?
चार साल से चल रहे इस युद्ध में लाखों लोग प्रभावित हो चुके हैं।
हालांकि बातचीत शुरू होना सकारात्मक संकेत है, लेकिन
विशेषज्ञ मानते हैं कि डोनबास पर रूस का अड़ियल रवैया सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।
अब पूरी दुनिया की नजर UAE में चल रही इस मीटिंग पर टिकी है।