मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। Donald Trump ने ईरान को 10 से 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि या तो तेहरान परमाणु समझौते पर सहमत हो जाए, वरना स्थिति “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” हो सकती है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब United States ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य तैनाती तेज कर दी है और दो एयरक्राफ्ट कैरियर समेत भारी नेवल बिल्डअप किया है।
ट्रंप का अल्टीमेटम: 10-15 दिन की डेडलाइन
ट्रंप ने कहा, “या तो हम डील कर लेंगे या यह उनके लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा।”
सूत्रों के मुताबिक, वॉशिंगटन ने ईरान के खिलाफ इमरजेंसी प्लान तैयार रखे हैं और सैन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei पहले ही साफ कर चुके हैं कि तेहरान अपने मिसाइल प्रोग्राम और क्षेत्रीय सहयोगियों से पीछे नहीं हटेगा।
ब्रिटेन ने अमेरिका को एयरबेस देने से किया इनकार
तनाव के बीच United Kingdom ने बड़ा फैसला लेते हुए संभावित हमले के लिए अपने एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, स्विंडन के पास स्थित RAF Fairford से अमेरिकी बॉम्बिंग ऑपरेशन की मंजूरी नहीं दी गई। ब्रिटिश पीएम Keir Starmer के प्रशासन का कहना है कि बिना स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय सहमति के हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।
USS Gerald R. Ford की तैनाती
मेडिटेरेनियन क्षेत्र में USS Gerald R. Ford सहित कई अमेरिकी वॉरशिप की मौजूदगी से संकेत मिलता है कि अमेरिका किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। हालांकि आधिकारिक तौर पर स्ट्राइक की पुष्टि नहीं की गई है।
रूस-ईरान की संयुक्त सैन्य कवायद
तनाव के बीच Russia और Iran ने सालाना सैन्य अभ्यास किया है। यह संदेश देता है कि तेहरान अकेला नहीं है।
ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट में लाइव फायर एक्सरसाइज भी शुरू की है—यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के करीब 20% तेल का व्यापार गुजरता है।
क्या युद्ध करीब है?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेना स्टैंडबाय पर है, लेकिन अंतिम फैसला ट्रंप को लेना है।
अगर कूटनीतिक बातचीत विफल होती है, तो मिडिल ईस्ट में बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल कीमतों, शेयर बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ेगा।