ईरान युद्ध के बीच भारत को बड़ी राहत
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर भारत समेत कई एशियाई देशों पर भी देखने को मिला, जहां एलपीजी (LPG) की कमी महसूस की जा रही थी। लेकिन अब इस संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है।
‘पाइक्सिस पायनियर’ जहाज लेकर आया उम्मीद
रविवार (22 मार्च 2026) को ‘पाइक्सिस पायनियर’ नाम का जहाज भारत पहुंच चुका है, जो हजारों टन एलपीजी लेकर आया है। यह जहाज कर्नाटक के न्यू मंगलुरु पोर्ट पर पहुंचा, जिससे देश में गैस की आपूर्ति को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इस जहाज में करीब 16,714 टन एलपीजी लदी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, यह जहाज 14 फरवरी को नीदरलैंड के पोर्ट से रवाना हुआ था और अब भारत में एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के लिए गैस उतारेगा।
कुल 72,700 टन LPG आने की तैयारी
सरकारी और पोर्ट सूत्रों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में न्यू मंगलुरु पोर्ट पर कुल 72,700 टन एलपीजी पहुंचने की संभावना है। यह खेप अलग-अलग जहाजों के माध्यम से भारत लाई जाएगी, जिससे गैस की कमी काफी हद तक दूर हो सकती है।
25 मार्च और 29 मार्च को भी आएंगे टैंकर
जानकारी के अनुसार, 25 मार्च को ‘अपोलो ओसिएन’ नाम का टैंकर भी पोर्ट पर पहुंचेगा। यह करीब 26,687 टन एलपीजी लेकर आएगा, जो इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम के लिए होगी।
इसके अलावा 29 मार्च को अमेरिका से एक और टैंकर लगभग 30,000 टन एलपीजी लेकर आने वाला है। यह गैस हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के लिए होगी, जिससे दक्षिण भारत में गैस सप्लाई और मजबूत होगी।
बेंगलुरु समेत कई शहरों को मिलेगा फायदा
मंगलुरु स्थित HPCL प्लांट इस एलपीजी को पाइपलाइन और बॉटलिंग प्लांट्स के जरिए बेंगलुरु और अन्य शहरों तक पहुंचाएगा। इससे घरेलू गैस सिलेंडर की उपलब्धता बेहतर होगी और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
संकट के बीच मजबूत हुई भारत की रणनीति
वैश्विक संकट के बावजूद भारत लगातार वैकल्पिक स्रोतों से गैस आयात कर अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने में जुटा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस तरह की आपूर्ति से गैस संकट काफी हद तक नियंत्रित हो जाएगा।