प्रयागराज। यौन शोषण के आरोपों में घिरे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। इस याचिका पर 27 फरवरी (शुक्रवार) को सुनवाई निर्धारित की गई है।
मामला झूंसी थाने में दर्ज यौन उत्पीड़न केस से जुड़ा है, जिसमें पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। कोर्ट नंबर 72 में फ्रेश कॉज लिस्ट में यह केस 142 नंबर पर सूचीबद्ध है। मामले की सुनवाई जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच में होगी।
किन-किन को बनाया गया पक्षकार?
अग्रिम जमानत अर्जी में उत्तर प्रदेश सरकार समेत पांच अन्य को पक्षकार बनाया गया है। इनमें शिकायतकर्ता आशुतोष पांडेय, दोनों नाबालिग पीड़ित, हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी शामिल हैं।
याचिका अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश के माध्यम से दाखिल की गई है।
कैसे दर्ज हुआ मुकदमा?
बताया जा रहा है कि तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने धारा 173(4) के तहत जिला अदालत में अर्जी दाखिल की थी। इसके बाद एडीजे रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने झूंसी पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया।
पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और अन्य अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
किन धाराओं में दर्ज है मामला?
एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की धारा 5L, 6, 3, 4(2), 16 और 17 के तहत दर्ज की गई है।
पुलिस ने दोनों नाबालिग पीड़ितों के बयान दर्ज कर मेडिकल परीक्षण भी कराया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि बयान में दो अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए हैं।
क्या हो सकती है आगे की कार्रवाई?
यदि हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं मिलती है, तो झूंसी थाना पुलिस स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य को गिरफ्तार कर सकती है।
फिलहाल सबकी नजर 27 फरवरी की सुनवाई पर टिकी है, जहां से यह तय होगा कि उन्हें राहत मिलेगी या गिरफ्तारी की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।