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मुरादाबाद में आयतुल्लाह खामनई की याद में सभा, शिया-सुन्नी एकता पर दिया गया जोर

मुरादाबाद में ईरान के सुप्रीम लीडर मरहूम आयतुल्लाह सैयद अली हुसैनी ख़ामनइ की शहादत को याद करते हुए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शहीदों को याद करना और उन्हें ईसाले सवाब पेश करना था। इस अवसर पर हिंदुस्तान में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम इलाही विशेष रूप से शामिल हुए।

आज़ाद नगर स्थित इमामबाड़े में हुआ आयोजन

यह कार्यक्रम मुरादाबाद के थाना मझोला क्षेत्र के आज़ाद नगर स्थित बैतूस सलात इमामबाड़े में आयोजित किया गया। सभा में शिया और सुन्नी दोनों समुदायों के बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में पहुंचे विशेष अतिथि डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम इलाही का भव्य स्वागत किया गया। आयोजन में धार्मिक विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया।

शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

सभा का मुख्य उद्देश्य शहीदों को याद करना और उनकी कुर्बानियों को नमन करना रहा। वक्ताओं ने ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद आयतुल्लाह अली खामनई की शहादत को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान दुआ और ईसाले सवाब पेश किया गया।

शिया-सुन्नी एकता पर जोर

कार्यक्रम में वक्ताओं ने शिया-सुन्नी एकजुटता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मुस्लिम समाज के अंदर आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होना जरूरी है। वक्ताओं ने कहा कि एकता से ही समाज मजबूत होगा और शांति कायम रह सकेगी।

अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी रखी बात

विशेष अतिथि डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के लोग न्याय का सम्मान करने वाले हैं और सच्चाई के साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने इसराइल के मुद्दे पर कहा कि उस पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकि वह जो कहता है वह करता नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका चाहे तो शांति संभव है, अन्यथा स्थिति जटिल बनी रह सकती है।

युद्ध से बढ़ेंगी आर्थिक परेशानियां

डॉ. इलाही ने कहा कि ईरान कभी जंग नहीं चाहता और शांति तथा इंसाफ का पक्षधर है। उन्होंने चेतावनी दी कि युद्ध की स्थिति में स्ट्रेट ऑफ हॉरमूज़ में तेल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आम लोगों की परेशानियां बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि ईरान लोगों को संकट में नहीं डालना चाहता और बातचीत के जरिए समाधान चाहता है।

कार्यक्रम का समापन दुआ के साथ हुआ, जिसमें विश्व शांति और भाईचारे की कामना की गई। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने आपसी सौहार्द बनाए रखने का संकल्प लिया।

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