महिला आरक्षण पर सियासत गरम, नेताओं में जुबानी जंग
महिला आरक्षण विधेयक 2023 को लेकर देशभर में बहस जारी है, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा अब सियासी तकरार का रूप ले चुका है। समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav और बीजेपी नेता Smriti Irani के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है।
कैसे शुरू हुई बयानबाज़ी?
दरअसल, संसद में महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए स्मृति ईरानी पर तंज कसते हुए कहा कि “सास-बहू वाली तो हार गई हैं।” उनका इशारा अमेठी चुनाव और स्मृति ईरानी के टीवी बैकग्राउंड की ओर था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सीटें आरक्षित कर दी जाएंगी तो महिलाओं के बीच ही प्रतिस्पर्धा होगी, इसलिए आरक्षण को पार्टी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए।
स्मृति ईरानी का जोरदार जवाब
अखिलेश के इस बयान पर स्मृति ईरानी ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने परिवारवाद पर हमला करते हुए कहा कि कुछ लोग राजनीति विरासत में पाते हैं, जबकि कुछ अपने दम पर आगे बढ़ते हैं। स्मृति ने कहा कि “जो लोग खुद कभी नौकरी नहीं करते, वे कामकाजी महिलाओं पर टिप्पणी कर रहे हैं।” साथ ही उन्होंने अखिलेश को सलाह दी कि वे “सीरियल से ध्यान हटाकर संसद पर फोकस करें।”
अखिलेश यादव का शायरी से पलटवार
इसके बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर शायरी के जरिए जवाब देते हुए तंज कसा—
“अगर अवाम से दोस्ती निभाई होती,
तो इतनी जल्दी विदाई की घड़ी आई न होती।”
इस बयान को स्मृति ईरानी के चुनावी हार से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे सियासी माहौल और गरमा गया है।
सियासत में बढ़ती तल्खी
दोनों नेताओं के बीच यह बयानबाज़ी सिर्फ व्यक्तिगत हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विचारधारा और राजनीति की दिशा भी झलकती है। जहां एक ओर बीजेपी महिला सशक्तिकरण के नाम पर इस बिल को ऐतिहासिक बता रही है, वहीं विपक्ष इसके लागू होने के तरीके और प्रभाव पर सवाल उठा रहा है।
आगे क्या होगा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। खासकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में इसका असर देखने को मिलेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि स्मृति ईरानी इस ताजा बयान पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और यह सियासी लड़ाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।