पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पद छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है। कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में संवैधानिक संकट को लेकर बहस तेज हो गई है।
ममता बनर्जी ने क्यों नहीं दिया इस्तीफा?
ममता बनर्जी का कहना है कि नैतिक रूप से उनकी जीत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में उनका मुकाबला भारतीय जनता पार्टी से नहीं, बल्कि चुनाव आयोग से था। ममता ने कहा कि चुनाव आयोग ने बीजेपी के पक्ष में काम किया। उन्होंने यह भी कहा कि वे अब बीजेपी के कथित अत्याचारों के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगी।
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा है कि अगर चुनावी जनादेश समाप्त हो चुका है, तो मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की संवैधानिक स्थिति क्या होगी।
महेश जेठमलानी ने बताया कानूनी रास्ता
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से इनकार करती हैं, तो राज्यपाल के पास संवैधानिक अधिकार मौजूद हैं।
जेठमलानी के मुताबिक, अगर कोई सरकार जनादेश खो चुकी है और फिर भी सत्ता में बने रहने की कोशिश करती है, तो राज्यपाल आवश्यक संवैधानिक कार्रवाई कर सकते हैं। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में सरकार को पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
7 मई बेहद अहम क्यों?
पश्चिम बंगाल विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, कार्यकाल समाप्त होने के बाद मौजूदा विधानसभा स्वतः प्रभावहीन हो जाती है।
ऐसे में यदि नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो राज्यपाल के पास विधानसभा भंग करने और नई संवैधानिक व्यवस्था लागू करने का अधिकार होता है। यही वजह है कि बंगाल की राजनीति में 7 मई को बेहद अहम तारीख माना जा रहा है।
क्या बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव?
ममता बनर्जी के रुख से बंगाल में राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है। बीजेपी पहले ही चुनावी नतीजों को जनादेश बता रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में राजभवन, तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच टकराव और तेज हो सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्यपाल अगला कदम क्या उठाते हैं।
आगे क्या?
फिलहाल बंगाल की राजनीति एक संवेदनशील मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ ममता बनर्जी इस्तीफा देने को तैयार नहीं हैं, दूसरी तरफ संवैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। आने वाले 24 से 48 घंटे पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।