देशभर में आज दवा दुकानदारों और केमिस्ट संगठनों ने 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। All India Organisation of Chemists and Druggists यानी AIOCD के नेतृत्व में हो रही इस हड़ताल के चलते देशभर की 10 लाख से ज्यादा मेडिकल दुकानों के बंद रहने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में मरीजों और आम लोगों को दवाइयां खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
क्यों हो रही है देशव्यापी हड़ताल?
केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री तेजी से बढ़ रही है और इसके लिए पर्याप्त नियम नहीं बनाए गए हैं। उनका कहना है कि इससे लाखों मेडिकल स्टोर मालिकों का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
AIOCD के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेएस शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल के मुताबिक सरकार की डिजिटल नीतियों के कारण रिटेल मेडिकल स्टोर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी के विरोध में यह हड़ताल बुलाई गई है।
केमिस्टों की 3 मुख्य मांगें
1. नोटिफिकेशन GSR 817 वापस लिया जाए
केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री को मंजूरी देने वाले इस नोटिफिकेशन को तुरंत रद्द किया जाए।
2. GSR 220 को खत्म करने की मांग
कोरोना महामारी के दौरान लागू किए गए इस नियम को भी वापस लेने की मांग की गई है।
3. भारी डिस्काउंट पर रोक
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले बड़े डिस्काउंट पर लगाम लगाने या फिर रिटेल दुकानदारों का प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाने की मांग की गई है।
मरीजों के लिए क्या हैं इंतजाम?
केमिस्ट एसोसिएशन ने साफ किया है कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं है। इसलिए कई जगहों पर इमरजेंसी दवाओं की व्यवस्था जारी रहेगी। स्वास्थ्य विभाग और ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन ने भी जरूरी कदम उठाए हैं।
कुछ राज्यों में टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। वहीं बड़े कॉर्पोरेट मेडिकल स्टोर्स जैसे Apollo Pharmacy और MedPlus को खुला रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मरीजों को जरूरी दवाएं मिलती रहें।
किन राज्यों में खुली रहेंगी दुकानें?
रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़, सिक्किम और उत्तराखंड में कई मेडिकल स्टोर खुले रह सकते हैं। हालांकि अलग-अलग राज्यों में स्थिति अलग हो सकती है।
ऑनलाइन दवा बिक्री पर बढ़ा विवाद
देश में ऑनलाइन दवाओं की बिक्री को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। केमिस्ट संगठनों का कहना है कि बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाओं की ऑनलाइन बिक्री मरीजों की सेहत के लिए भी खतरा बन सकती है। वहीं ऑनलाइन कंपनियां इसे लोगों की सुविधा और डिजिटल हेल्थकेयर का हिस्सा बता रही हैं।