राष्ट्रीय

भट्टी की तरह तपेगी धरती! भारत पर मंडरा रहा ‘सुपर एल नीनो’ का खतरा, टूट सकते हैं 150 साल के रिकॉर्ड

नई दिल्ली

दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिकों ने साल 2026 को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार सामान्य एल नीनो नहीं, बल्कि “सुपर एल नीनो” बनने की आशंका है, जिसका असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो गर्मी के पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं और धरती सचमुच भट्टी की तरह तप सकती है। उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिम भारत में भीषण हीटवेव, पानी की कमी और कमजोर मानसून जैसे हालात देखने को मिल सकते हैं।

क्या होता है एल नीनो?

एल नीनो एक मौसमी प्रक्रिया है, जो प्रशांत महासागर में समुद्र के तापमान बढ़ने से बनती है। सामान्य तौर पर दक्षिण अमेरिका के पास समुद्र का पानी ठंडा रहता है और एशिया की ओर गर्म पानी जमा रहता है। लेकिन जब ट्रेड विंड्स कमजोर पड़ जाती हैं, तब गर्म पानी वापस पूर्वी प्रशांत महासागर की तरफ फैलने लगता है। इसी स्थिति को एल नीनो कहा जाता है।

इस बदलाव का असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। भारत में इसका सबसे बड़ा प्रभाव मानसून और गर्मी पर देखने को मिलता है।

क्यों खतरनाक है ‘सुपर एल नीनो’?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जब समुद्र का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाता है, तब उसे “सुपर एल नीनो” कहा जाता है। फिलहाल मध्य प्रशांत महासागर का तापमान तेजी से बढ़ रहा है और कई वैज्ञानिक इसे बेहद चिंताजनक मान रहे हैं।

इतिहास में 1982, 1997 और 2015 में सुपर एल नीनो का असर देखा गया था। उन वर्षों में कई देशों में सूखा, जंगलों में आग, रिकॉर्ड गर्मी और फसल बर्बादी जैसी घटनाएं हुई थीं।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत में एल नीनो का सीधा असर मानसून पर पड़ता है। मानसून कमजोर होने से बारिश कम होती है और तापमान तेजी से बढ़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सुपर एल नीनो सक्रिय हुआ तो अप्रैल से जून तक उत्तर भारत में 45 से 50 डिग्री तक तापमान पहुंच सकता है।

दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में हीटवेव की अवधि लंबी हो सकती है। किसानों के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है क्योंकि कम बारिश से खेती प्रभावित हो सकती है।

ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ा रही खतरा

वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती पहले से ही ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से गर्म हो रही है। ऐसे में सुपर एल नीनो का असर और ज्यादा खतरनाक हो सकता है। समुद्र के भीतर जमा गर्म पानी वातावरण को और अधिक गर्म करेगा, जिससे दुनिया भर में मौसम असामान्य हो सकता है।

विशेषज्ञों ने लोगों को गर्मी से बचाव, पानी की बचत और स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

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