भारतीय रुपया लगातार दबाव में है और डॉलर के मुकाबले इसकी गिरावट ने अब Reserve Bank of India की चिंता बढ़ा दी है। इस सप्ताह रुपया पहली बार करीब 97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। ऐसे में अब RBI अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और रुपये की कमजोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठा सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI के गवर्नर Sanjay Malhotra समेत शीर्ष अधिकारियों ने हाल ही में कई अहम बैठकें की हैं। इन बैठकों में ब्याज दरें बढ़ाने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और डॉलर भंडार मजबूत करने जैसे विकल्पों पर गंभीर चर्चा हुई है।
बढ़ सकती हैं ब्याज दरें
विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये को संभालने के लिए RBI रेपो रेट बढ़ाने का फैसला ले सकता है। अगर ऐसा होता है तो बैंकों के लिए RBI से कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा क्योंकि बैंक होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं।
ऐसी स्थिति में लोगों की EMI बढ़ सकती है और कर्ज लेना पहले से ज्यादा महंगा हो जाएगा। माना जा रहा है कि RBI की अगली मौद्रिक नीति समिति यानी MPC बैठक 5 जून से शुरू होगी, लेकिन हालात गंभीर होने पर केंद्रीय बैंक इमरजेंसी बैठक भी बुला सकता है।
2013 वाले फॉर्मूले पर फिर नजर
रुपये की गिरती कीमत को संभालने के लिए RBI एक बार फिर 2013 के “टेपर टैंट्रम” संकट के दौरान अपनाए गए फॉर्मूले पर विचार कर रहा है। उस समय विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए NRI डिपॉजिट स्कीम लाई गई थी, जिससे बड़ी मात्रा में डॉलर जुटाए गए थे।
इस बार भी RBI अप्रवासी भारतीयों के लिए विशेष जमा योजनाएं ला सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार इससे करीब 50 अरब डॉलर तक जुटाने की योजना बनाई जा रही है।
करेंसी स्वैप और डॉलर बॉन्ड पर भी चर्चा
डॉलर की कमी दूर करने के लिए RBI अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ करेंसी स्वैप एग्रीमेंट बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। इसके अलावा सरकार की मदद से विदेशी बाजारों में संप्रभु डॉलर बॉन्ड जारी करने का विकल्प भी चर्चा में है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कदम तभी उठाए जाएंगे जब रुपये पर दबाव लंबे समय तक बना रहता है।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं तो इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। नए लोन महंगे हो जाएंगे और मौजूदा फ्लोटिंग रेट लोन की EMI भी बढ़ सकती है। वहीं कंपनियों के लिए फंड जुटाना महंगा होगा, जिससे निवेश और बाजार पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल सबकी नजर RBI की अगली बैठक और उसके फैसलों पर टिकी है, क्योंकि आने वाले दिनों में केंद्रीय बैंक की रणनीति ही रुपये की दिशा तय कर सकती है।