पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कांचरापाड़ा स्थित हरनेट इंग्लिश मीडियम स्कूल के एक लंबे समय से बंद कमरे में पुलिस ने छापेमारी की, जहां से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई। कमरे में नोटों के इतने बंडल मिले कि पुलिस टीम भी हैरान रह गई। बरामद नकदी की गिनती के लिए तीन मशीनों का इंतजाम करना पड़ा और पूरी रात गिनती का काम चलता रहा। आखिरकार पुलिस ने कुल 1.77 करोड़ रुपये नकद बरामद होने की पुष्टि की।
गुप्त सूचना पर पुलिस ने मारा छापा
जानकारी के अनुसार बीजपुर थाना पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी कि स्कूल के एक बंद कमरे में बड़ी मात्रा में नकदी रखी गई है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने देर रात स्कूल परिसर में छापेमारी की। जब कमरे का ताला खोला गया तो अंदर नोटों के बंडल देखकर पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। इसके बाद मौके पर अतिरिक्त सुरक्षा बल भी बुलाया गया।
रातभर चली नोटों की गिनती
कमरे में रखी गई नकदी इतनी अधिक थी कि उसे हाथों से गिनना संभव नहीं था। पुलिस ने तत्काल तीन कैश काउंटिंग मशीनें मंगवाईं। रातभर चली गिनती के बाद सुबह करीब साढ़े पांच बजे तक पूरी रकम की गणना पूरी हुई। जांच में कुल 1 करोड़ 77 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।
कैशियर और अकाउंटेंट गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने स्कूल के कैशियर अविक नाथ और असिस्टेंट अकाउंटेंट सायन घोष को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बाद में दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान कैशियर इस बात का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया कि इतनी बड़ी रकम स्कूल के बंद कमरे में क्यों रखी गई थी और इसे बैंक में जमा क्यों नहीं कराया गया।
ब्लैक मनी के आरोप, स्कूल प्रशासन का अलग दावा
स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि बरामद रकम कथित तौर पर ब्लैक मनी हो सकती है। कुछ लोगों ने स्कूल प्रबंधन और स्थानीय राजनीतिक संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि स्कूल के प्रिंसिपल विकास चंद्र पाल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह रकम छात्रों की एडमिशन फीस और किताबों की बिक्री से संबंधित है। उनका कहना है कि तकनीकी कारणों से पैसा समय पर बैंक में जमा नहीं कराया जा सका था।
जांच में जुटी पुलिस
पुलिस ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। बरामद नकदी को सुरक्षा के बीच कब्जे में ले लिया गया है और स्कूल प्रबंधन समेत कई अन्य लोगों से पूछताछ की जा रही है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी रकम स्कूल परिसर में कैसे पहुंची और क्या इसके पीछे कोई वित्तीय अनियमितता है।