पटना/सोर्स। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक कार्यक्रम के दौरान नवनियुक्त आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन का नकाब (हिजाब) हटाने के मामले में विवादों में घिर गए हैं। इस घटना को लेकर बेंगलुरु के वकील ओवैज हुसैन एस ने मुख्यमंत्री के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज करने और वैधानिक कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायतकर्ता ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि यह घटना महिला की गरिमा, सहमति और धार्मिक सम्मान से जुड़ी है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
बेंगलुरु में दर्ज कराई गई शिकायत
ओवैज हुसैन एस ने यह शिकायत कर्नाटक राज्य पुलिस के डीजीपी व आईजीपी, बेंगलुरु पुलिस आयुक्त, कर्नाटक राज्य महिला आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), कर्नाटक राज्य अल्पसंख्यक आयोग और महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपी है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री की कथित कार्रवाई बिना सहमति शारीरिक हस्तक्षेप, महिला की मर्यादा भंग, सार्वजनिक अपमान, यौन उत्पीड़न और धार्मिक गरिमा के उल्लंघन की श्रेणी में आती है।
सोशल मीडिया वीडियो से भड़का मामला
शिकायत के मुताबिक, घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसे बेंगलुरु सहित देशभर में देखा गया। वकील का दावा है कि यह वीडियो न केवल संबंधित महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि समूचे महिला समाज का अपमान करता है।
क्या है पूरा मामला
यह विवाद 15 दिसंबर 2025 को बिहार सचिवालय संवाद में आयोजित एक कार्यक्रम से जुड़ा है, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक हजार से अधिक आयुष डॉक्टर्स को नियुक्ति पत्र बांटे।
इनमें:
- 685 आयुर्वेद
- 393 होम्योपैथी
- 205 यूनानी पद्धति के डॉक्टर शामिल थे।
कार्यक्रम के दौरान 10 अभ्यर्थियों को मंच से स्वयं मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र सौंपे। जब नुसरत परवीन नियुक्ति पत्र लेने मंच पर पहुंचीं, तो मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर नाराजगी जताते हुए कहा, “यह क्या है?” और इसके बाद उनका हिजाब हटा दिया।
मंच पर मची हलचल, अधिकारी ने हटाया अलग
घटना के बाद घबराई हुई नवनियुक्त चिकित्सक को वहां मौजूद एक अधिकारी ने तुरंत एक ओर कर दिया। इसी दौरान मुख्यमंत्री के बगल में खड़े उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उन्हें रोकने की कोशिश करते हुए उनकी आस्तीन खींचते नजर आए, जिसका वीडियो भी सामने आया है।
जीरो FIR और निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले में जीरो एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए और कानून के तहत उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल इस मामले पर बिहार सरकार या संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला हो सकता है।