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महाराष्ट्र में बढ़ी सियासी हलचल: उद्धव गुट के 14 विधायक शिंदे के संपर्क में होने की चर्चा, इमरजेंसी बैठक बुलाई!

सांसदों के बाद अब विधायकों में टूट की आशंका

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के बगावती रुख की चर्चाओं के बीच अब पार्टी के विधायकों में भी टूट की अटकलें लगाई जा रही हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे गुट के 20 विधायकों में से 14 विधायक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं और अलग गुट बनाने या शिंदे गुट में शामिल होने पर विचार कर सकते हैं।

हालांकि, इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न तो शिवसेना (यूबीटी) और न ही शिंदे गुट की ओर से विधायकों के संभावित दल-बदल को लेकर कोई औपचारिक बयान जारी किया गया है।

उद्धव ठाकरे ने बुलाई आपात बैठक

विधायकों के संपर्क में होने की खबरों के बाद शिवसेना (यूबीटी) में हलचल बढ़ गई है। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्थिति की समीक्षा के लिए अपने आवास ‘शिवालय’ में दोपहर 2:30 बजे विधायकों की अहम बैठक बुलाई है।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने पहले भी इस मुद्दे पर आंतरिक चर्चा की थी और अब संभावित राजनीतिक नुकसान को रोकने के लिए विधायकों के साथ सीधा संवाद करने की तैयारी की जा रही है।

‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा तेज

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ अब सांसदों के बाद विधायकों तक पहुंच चुका है। यदि 14 विधायक वास्तव में शिंदे गुट के साथ जाते हैं, तो विधानसभा में उद्धव ठाकरे गुट की संख्या काफी कम हो सकती है।

विश्लेषकों का मानना है कि ऐसा होने पर महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

शिंदे गुट और आदित्य ठाकरे की प्रतिक्रिया

शिवसेना नेता दीपक केसरकर ने कहा कि यदि और सांसद या विधायक महायुति के साथ आते हैं, तो इससे गठबंधन और केंद्र की सरकार मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के विकास को और गति मिलेगी।

वहीं, आदित्य ठाकरे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता पक्ष को शासन और जनहित के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों, महिलाओं और आम लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है और केवल राजनीतिक तोड़फोड़ की राजनीति की जा रही है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सभी की नजर उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठक पर टिकी हुई है। यदि विधायकों के असंतोष की खबरें सही साबित होती हैं, तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों की रणनीति और बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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