अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले पर कांग्रेस अध्यक्ष का केंद्र सरकार पर निशाना
अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा घोटाले को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की लूट की खबरें सामने आई हैं और इस कथित घोटाले में कुछ पुजारियों के शामिल होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
हालांकि, इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) जांच कर रही है और अभी तक किसी भी जांच एजेंसी ने 5,000 करोड़ रुपये के घोटाले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
खरगे ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि राम मंदिर में पूजा-पाठ करने वाले कुछ लोग भगवान राम के नाम पर ही लोगों की आस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिरों के दान-पात्रों में आने वाला पैसा कहीं और जा रहा है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
खरगे ने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है, तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
SIT जांच की समयसीमा पर भी उठाए सवाल
राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 15 दिन का समय दिए जाने पर भी खरगे ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पूरी तरह गंभीर है तो दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
खरगे ने तंज कसते हुए कहा, “जब भगवान आपके साथ हैं, मंदिर आपके साथ है, प्रधानमंत्री मोदी आपके साथ हैं और आप मुख्यमंत्री हैं, तो आपको 15 दिन की जरूरत क्यों है?”
विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बढ़ी सियासी तकरार
राम मंदिर देशभर में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर से जुड़े किसी भी विवाद का राजनीतिक असर व्यापक हो सकता है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हैं, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक बहस का कारण बन सकता है, खासकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल मामले की जांच जारी है और विशेष जांच दल को निर्धारित समय में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित अनियमितताओं के आरोप कितने सही हैं और किन लोगों की भूमिका सामने आती है।