अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए जाने की बात सूत्रों के हवाले से सामने आई है। हालांकि इस मामले में संबंधित पक्षों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
45 दिनों की CCTV फुटेज में 70 बार चोरी का दावा
सूत्रों के अनुसार SIT ने 27 अप्रैल से 5 जून तक की CCTV फुटेज का विश्लेषण किया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लगभग 40 से 45 दिनों की रिकॉर्डिंग में चढ़ावे की गिनती के दौरान करीब 70 बार पैसे चोरी करते हुए लोग दिखाई दिए।
जांच एजेंसी का कहना है कि गिरफ्तार किए गए कई लोगों को चढ़ावे की गिनती के कार्य में कथित तौर पर चंपत राय और अनिल मिश्रा की सिफारिश पर लगाया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ नियुक्तियां बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के की गईं।
टिन्नू यादव के पास थी बड़ी जिम्मेदारी
SIT की जांच में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक चढ़ावे के बॉक्स की चाबियां उसके पास रहती थीं। गिनती के कार्य में किन लोगों को शामिल किया जाएगा, इस पर भी उसका प्रभाव बताया गया है।
बताया जा रहा है कि मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कुछ फैसलों में भी उसकी भूमिका थी, जिससे उसकी प्रभावशाली स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मई में हुआ चोरी का शक, गुप्त कैमरे ने खोली पोल
मई के अंतिम सप्ताह में ट्रस्ट को चढ़ावे में गड़बड़ी का संदेह हुआ। इसके बाद नोट गिनने वाले कमरे में गुप्त कैमरे लगाए गए। इन्हीं कैमरों की रिकॉर्डिंग से कथित चोरी के सबूत मिलने का दावा किया गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी CCTV कैमरों की स्थिति और ब्लैक स्पॉट की जानकारी रखते थे। कई बार कैमरों को बंद करने या कैमरे के सामने खड़े होकर दूसरे व्यक्ति द्वारा पैसे जेब में रखने जैसी तरकीबें अपनाई गईं।
वाउचर में हेराफेरी और संपत्ति बढ़ने के आरोप
जांच में अनुकल्प मिश्रा पर वाउचर तैयार करने में गड़बड़ी करने के आरोप लगे हैं। SIT का दावा है कि चढ़ावे की रकम कम दिखाकर अतिरिक्त राशि गायब की जाती थी।
मामले में लवकुश मिश्रा के घर के पीछे गोबर के ढेर से 12 लाख रुपये बरामद होने की बात भी सामने आई है। वहीं अनिल मिश्रा पर भी ट्रस्टी बनने के बाद संपत्ति बढ़ने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि SIT की रिपोर्ट के आधार पर सामने आए ये आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया तथा आधिकारिक निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगा।