नई दिल्ली। पाकिस्तान के कराची में हुए आतंकी हमले के बाद एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। पाकिस्तान सेना ने हमले के पीछे भारत का हाथ होने का दावा किया है। वहीं, भारत में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने पाकिस्तान के आरोपों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आतंकवाद पर पाकिस्तान की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
पाकिस्तान सेना ने क्या कहा?
पाकिस्तान सेना के जनसंपर्क विभाग (DG ISPR) की ओर से जारी बयान में कहा गया कि 27 जून 2026 को कराची में पाकिस्तान रेंजर्स (सिंध) के एक कैंप पर आतंकवादी हमला हुआ। सेना का दावा है कि हमले के दौरान सुरक्षा बलों ने तीन हमलावरों को मार गिराया और एक घायल हमलावर को गिरफ्तार किया, जिसे अफगान नागरिक बताया गया।
पाकिस्तानी सेना ने इस हमले के लिए भारत पर आरोप लगाते हुए दावा किया कि हमलावर कथित तौर पर भारत समर्थित संगठन जमात-उल-अहरार से जुड़े थे। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से इस दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक साक्ष्य पेश नहीं किया गया।
कांग्रेस ने दिया जवाब
पाकिस्तान के आरोपों पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के वर्ष 2011 के उस चर्चित बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान से कहा था कि—
“आप अपने घर के आंगन में सांप पालकर यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वे सिर्फ आपके पड़ोसियों को ही काटेंगे। आखिरकार वे उसी इंसान को डसेंगे जिसने उन्हें पाला है।”
मनीष तिवारी ने कहा कि पाकिस्तान को अपने भीतर झांकने की जरूरत है और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में आतंकवाद फैलाने की बजाय पाकिस्तान को अपने आंतरिक हालात सुधारने चाहिए।
कराची हमले में जवानों की मौत
पाकिस्तान सेना के अनुसार, इस आतंकी हमले में तीन सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई, जबकि चार अन्य जवान घायल हुए हैं। सेना ने कहा कि सुरक्षा बलों ने समय रहते कार्रवाई कर हमलावरों को कैंप के भीतर प्रवेश करने से रोक दिया। साथ ही पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ अभियान जारी रखने और हमले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।
भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ा तनाव
कराची हमले के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। पाकिस्तान जहां लगातार भारत पर आरोप लगा रहा है, वहीं भारत पहले भी ऐसे आरोपों को निराधार और तथ्यों से परे बता चुका है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बयान भी चर्चा में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवाद जैसे संवेदनशील मामलों में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस और स्वतंत्र जांच आवश्यक होती है।