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3 दिन का आमरण अनशन… 15 साल बाद पूरा हुआ सपना! छत्रपति शिवाजी महाराज चौक बना इंपीरियल चौक

मुरादाबाद। मुरादाबाद में छत्रपति शिवाजी महाराज चौक पर प्रतिमा स्थापना के बाद वर्ष 2011 का वह आंदोलन एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जिसमें तत्कालीन शिवसेना नेता राजीव गांधी ने इंपीरियल चौक का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रखने की मांग को लेकर आमरण अनशन किया था। प्रतिमा स्थापित होने के बाद उन्होंने इसे अपने लंबे संघर्ष और संकल्प की पूर्ति बताया।

तीन दिन तक किया था आमरण अनशन

राजीव गांधी के अनुसार, वर्ष 2011 में शिवसेना ने ब्रिटिश शासन की पहचान माने जाने वाले इंपीरियल चौक का नाम बदलने की मांग उठाई थी। उस समय वे शिवसेना मुरादाबाद मंडल के मंडल उप प्रमुख थे और उन्होंने इस मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू किया।

उन्होंने घोषणा की थी कि जब तक चौक का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर नहीं रखा जाएगा और उनकी प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय नहीं होगा, तब तक अनशन जारी रहेगा।

आंदोलन को मिला जनसमर्थन

अनशन के दौरान बड़ी संख्या में शिवसेना कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक आंदोलन से जुड़े। तीन दिनों तक चले इस आंदोलन ने शहर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और इसे व्यापक जनसमर्थन मिला।

राजीव गांधी का कहना है कि जनता के समर्थन के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया।

प्रशासन ने दिया था आश्वासन

बताया गया कि आंदोलन के चौथे दिन तत्कालीन नगर आयुक्त और एडीएम सिटी धरना स्थल पर पहुंचे और मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद अधिकारियों ने राजीव गांधी को जूस पिलाकर आमरण अनशन समाप्त कराया।

बाद में प्रशासन द्वारा चौक का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज चौक घोषित किया गया। इसके साथ ही लंबे समय से उठ रही प्रतिमा स्थापना की मांग भी आगे बढ़ी।

स्मार्ट सिटी योजना के तहत स्थापित हुई प्रतिमा

शहर में चल रही स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत चौक पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित की गई। प्रतिमा स्थापना के बाद इस आंदोलन से जुड़े लोग इसे वर्षों पुराने संकल्प की पूर्ति के रूप में देख रहे हैं।

राजीव गांधी ने कहा कि प्रतिमा स्थापित होने से उन्हें अत्यंत खुशी है और वर्षों पहले देखा गया सपना अब साकार हो गया है।

समाज सेवा जारी रखने की बात कही

राजनीतिक सक्रियता से दूर होने के बाद भी राजीव गांधी वर्तमान में श्री बाबा अमरनाथ मानव कल्याण समिति के माध्यम से सामाजिक और धार्मिक कार्यों में सक्रिय हैं।

उन्होंने कहा कि समाज सेवा और सनातन संस्कृति के लिए कार्य करने के लिए किसी राजनीतिक पद की आवश्यकता नहीं होती। भविष्य में भी वे व्यक्तिगत स्तर पर समाज और जरूरतमंद लोगों की सेवा करते रहेंगे।


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