नई दिल्ली। ग्लोबल ऑयल मार्केट में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव, इजरायल की चेतावनियों और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही कम होने की खबरों ने कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है।
हालांकि, दूसरी ओर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से यूक्रेन के साथ संभावित शांति समझौते को लेकर दिए गए संकेतों ने बाजार को कुछ राहत दी है। इसी वजह से क्रूड ऑयल में तेज उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
6 हफ्ते के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा क्रूड
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 95.52 डॉलर प्रति बैरल, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड करीब 91.30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में सैन्य टकराव बढ़ने से तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका ने कीमतों को ऊपर धकेला।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ओर से भी ईरान को लेकर सख्त रुख सामने आया है। उन्होंने संकेत दिया कि कमर्शियल जहाजों पर हमले रोकने तक बातचीत की संभावना नहीं है।
तेल बाजार के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मिडिल ईस्ट दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। यहां तनाव बढ़ने पर सप्लाई और शिपिंग दोनों पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
पुतिन के बयान से बाजार को मिली थोड़ी राहत
जहां अमेरिका-ईरान तनाव ने तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ाया, वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बयान ने बाजार को कुछ राहत दी।
पुतिन ने एक इकोनॉमिक फोरम में यूक्रेन के साथ शांति समझौते की संभावनाओं के संकेत दिए। बाजार में यह उम्मीद बनी कि यदि रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष कम होता है तो रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों का जोखिम घट सकता है और वैश्विक ईंधन आपूर्ति में सुधार हो सकता है।
इसी उम्मीद के कारण कच्चे तेल की कीमतों में एकतरफा तेजी नहीं बनी और बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहा।
होर्मुज स्ट्रेट में घटा जहाजों का आवागमन
क्रूड ऑयल के लिए होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को इस रास्ते से केवल 6 कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि सामान्य परिस्थितियों में रोजाना 13 से अधिक जहाज इस मार्ग से गुजरते हैं।
ईरान की ओर से कुछ विदेशी जहाजों को ब्लैकलिस्ट किए जाने और जब्ती की चेतावनी की खबरों ने भी शिपिंग और तेल बाजार की चिंता बढ़ाई है।
हालांकि, दूसरी ओर ईरान से छूट मिलने के बाद इराक ने अगस्त में अपना तेल निर्यात बढ़ाकर करीब 2.34 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर लिया। इससे ग्लोबल सप्लाई पर कुछ राहत मिलने की उम्मीद भी बनी है।
क्या भारत में महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल?
क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी का असर दुनिया के कई देशों के ईंधन बाजार पर पड़ सकता है। भारत भी अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों और रुपये की विनिमय दर में बदलाव का घरेलू ईंधन बाजार पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ते ही भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे। घरेलू कीमतों पर कई अन्य कारक भी असर डालते हैं।
फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम में बदलाव नहीं किया है। रिपोर्ट में दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बताया गया है।
आगे किस दिशा में जाएगा तेल बाजार?
आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल की दिशा मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम पर निर्भर रह सकती है। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ता है या कम होता है, होर्मुज स्ट्रेट से तेल और कमोडिटी जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है या नहीं और इजरायल की ओर से ईरान के ऊर्जा ढांचे को लेकर कोई कार्रवाई होती है या नहीं—इन सभी घटनाक्रमों पर बाजार की नजर रहेगी।
अगर सप्लाई चेन में बड़ा व्यवधान आता है तो क्रूड ऑयल की कीमतों पर और दबाव बन सकता है। वहीं, तनाव कम होने और सप्लाई सामान्य रहने की स्थिति में कीमतों में राहत भी देखने को मिल सकती है।
ऐसे में फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम को लेकर किसी निश्चित बढ़ोतरी की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में जारी उथल-पुथल ने आने वाले दिनों के लिए अनिश्चितता जरूर बढ़ा दी है।